कई बार लोगों को ब्लड प्रेशर चेक कराने की आदत होती है. वह खाना खाने या कहीं से आने के बाद भी ब्लड प्रेशर को चेक करते हैं. यह आदत सही भी है और गलत भी. सही मायने में देखा जाए तो कई बार व्यक्ति को घबराहट के बारे में पता नहीं लग पाता है. वह सोचते हैं कि शायद तनाव के कारण ऐसा हो रहा है लेकिन ऐसा बिल्कुल भी नहीं होता है. ब्लड प्रेशर के बढ़ने के बाद कई बार हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है. वह लोग जिनको हार्ट अटैक से संबंधित समस्या होती है. उनके लिए यह काफी फायदेमंद होता है.
किन लोगों के लिए यह फायदेमंद नहीं
यह उन लोगों के अच्छा नहीं होता है जो हर काम को करने के बाद ब्लड प्रेशर मापते हैं. ऐसा करने के कारण मेजरमेंट Anxiety होती है. यानी की कई बार रीडिंग हाई नहीं होती है लेकिन तनाव इतना ज्यादा होता है कि लोगों की रीडिंग हाई दिखाई देती है. हर समय तनाव और टेंशन में रहने के कारण व्यक्ति का ब्लड प्रेशर अपने आप हाई रहने लग जाता है.
कब और कितना मापना सही
डॉक्टर का कहना है कि हाई ब्लड प्रेशर के कारण के मरीजों के लिए सुबह और शाम के समय ब्लड प्रेशर मापना उचित होता है. हालांकि, जिन लोगों को बार-बार सिरदर्द, हमेशा थकान या बार-बार उनके दिल की धड़कन तेज हो जाती है. ऐसे समय में डॉक्टर को समझने में काफी ज्यादा आसानी होती है कि आखिर उनकी इतनी रीडिंग होने का कारण क्या है. आप चाहें तो डॉक्टर के पास जाने से पहले भी एक बार रीडिंग करके जा सकते हैं.
कैसे और किन चीजों को ध्यान में रखें मापने से पहले
- जांच से पहले किसी भी प्रकार का नशीला उत्पाद, धूम्रपान या योगा करने से बचना चाहिए.
- पांच मिनट शांति से बैठना चाहिए ताकि स्टेबल टाइम में रीडिंग कैसी है. इसका ध्यान हो.
- मशीन भरोसेमंद है कि नहीं यह भी ध्यान रखना चाहिए. कई लोगों पर मशीन जांच करें और देखे की सबकी रीडिंग कैसी आ रही है. अगर आपको कुछ गड़बड़ लग रही है. तो तुरंत दूसरी मशीन लगाए.
- डॉक्टर कहते हैं कि कई लोगों को बार-बार रीडिंग चेक करने की बीमारी होती है. ऐसे समय में लोगों को काफी घबराहट होती है और हर समय तनाव रहता है, जिससे अपने आप रीडिंग ज्यादा और कम होती है.
ये भी पढ़ें: जानें दिवालिया बैंक से खाताधारकों को किस तरीके से मिल सकता है पैसा
