Hair Transplant new rule India: हाल ही में हेयर ट्रांसप्लांट में लापरवाही के कारण लोगों को काफी ज्यादा परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था. इसी से संबंधित शिकायतों के बढ़ने के कारण केंद्र सरकार एक बड़ा फैसला लेनी वाली है. बता दें कि सरकार अब इन्हीं चीजों से बचने के लिए हेयर ट्रांसप्लांट को कॉस्मेटिक सैलून से हटाकर सर्जिकल प्रक्रिया में डालने वाली है. सरकार का इस कदम के पीछे मुख्य कारण इनपर रोक लगाना है.
क्या हैं इसके पीछे का कारण
हेयर सैलून में लोग ज्यादातर बाल को कटवाने या उनकी स्टाइलिंग करवाने जाते हैं. दूसरी तरफ हेयर ट्रांसप्लांट में एनेस्थीसिया, सुई, ऑपरेशन थिएटर और उसके एक्सपर्ट डॉक्टर की जरूरत होती है. बता दें कि यह एक मेडिकल प्रक्रिया है. इसी के चलते अब नेशनल काउंसिल फॉर क्लिनिकल एस्टैब्लिशमेंट्स यानि NCCE ने हेयर ट्रांसप्लांट सेंटर्स के लिए कुछ नियमों को तैयार किया है. इसके अनुसार एक्सपर्ट डॉक्टर, डर्मेटोलॉजिस्ट एवं प्लास्टिक सर्जन ही हेयर ट्रांसप्लांट कर पाएंगे. अगर उनपर मेडिकल डिग्री नहीं है. तो वह इस काम को नहीं कर सकेंगे.
इतने लोगों की जान गई
IMARC Group के अनुसार भारत में इसका बाजार 252 मिलियन डॉलर है. 2033 में यह 1.7 बिलियन डॉलर के करीब पहुंच सकता है. FUE और DHI जैसी तकनीकों की वजह से इस इंडस्ट्री में 80 प्रतिशत पुरुषों की कमाई होती है. भारत में 3.5 लाख हेयर ट्रांसप्लांट हर साल होते हैं. 2016 में तो छह लोगों की मौत इलाज में लापरवाही की वजह से हुई थी.
क्या है यह फैसला
बता दें कि यह जानकारी तीन सरकारी अधिकारियों से आई थी. उन्हीं में से एक अधिकारी ने बताया था कि यह नए रूल्स गैरकानूनी, फर्जी और लोगों को लूटने वाले क्लीनिकों के लिए बनाए गए हैं. हेयर ट्रांसप्लांट एक मेडिकल प्रक्रिया है न की सैलून का कोई सामान्य काम है. इस फैसले को मई 2022 में दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देश पर लिया गया है. कोर्ट का कहना था कि हेयर ट्रांसप्लांट मेडिकल सर्जरी में आता है. यह केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए. स्वास्थ्य मंत्रालय इनको तब तक लागू नहीं कर सकता है, जब तक की इनपर कोई फैसला नहीं लिया जा सकें.
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यहां पर दी गई जानकारी विशेषज्ञ और रिसर्च पर है. किसी भी चीज की सलाह लेने से पहले डॉक्टरों की सलाह लें. इसको मेडिकल सलाह के रूप में न लें.
