Noida eow Action: नोएडा के 15 और बिल्डर आर्थिक अपराध शाखा (EOW) के रडार पर हैं. नोएडा अथॉरिटी की तरफ से EOW में इनके खिलाफ भेजी गई रिपोर्ट पर जांच पूरी हो चुकी है. अब इसके बाद कार्रवाई होने की तैयारी शुरू हो गई है. जांच के दौरान अथॉरिटी से जो डॉक्यूमेंट EOW ने इन बिल्डरों और इनके प्रोजेक्टों के संबंध में मांगे थे. वह सब नोएडा अथॉरिटी ने भेज दिए हैं. माना जा रहा है कि अब कभी भी इन बिल्डरों पर गाज गिर सकती है.
बायर्स के कितने हजार फंसे
नोएडा अथॉरिटी का इन 15 प्रोजेक्टों में करीब 55 हजार करोड़ रुपये फंसा हुआ है. जानकारी के मुताबिक शहर में 25 से 30 हजार बायर्स इन प्रोजेक्टों में फंसे हुए हैं.
केंद्र की अमिताभ कांत पॉलिसी को इसीलिए प्रदेश सरकार ने लागू किया था ताकि ज्यादा से ज्यादा फंसे हुए प्रोजेक्टों को रिवाइव किया जा सके. इस पॉलिसी के लागू होने के बाद भी जिन बिल्डरों ने प्रोजेक्ट के रिवाइव करने में कोई रुचि नहीं दिखाई. जिसके बाद नोएडा अथॉरिटी ने इनके खिलाफ ईओडब्ल्यू में रिपोर्ट भेजी थी. इनमें से कई बिल्डरों पर मुकदमा दर्ज हो चुका है. तो कुछ की जांच चल रही थी. दरअसल, करीब 30 हजार लोगों को अपने घर का इंतजार खत्म नहीं हो रहा.
क्या लगे हैं आरोप
इनमें ज्यादातर बिल्डरों पर फंड डायवर्जन का आरोप लगा है जिसके बाद ये प्रोजेक्ट फंस गए हैं. सीधी भाषा में कहें तो संबंधित प्रोजेक्ट का पैसा उसी प्रोजेक्ट में नहीं लगाकर किसी दूसरी कंपनी या प्रोजेक्ट में इन बिल्डरों ने लगा दिया है. जिसकी वजह से संबंधित प्रोजेक्ट फंस गया है. कहा जा रहा है कि इनमें करीब 25 से 30 हजार बायर्स हैं. इतना ही नहीं नोएडा अथॉरिटी का भी करीब 55 हजार करोड़ रुपये इन बिल्डरों पर फंसा हुआ है.
ईओडब्लू को बिल्डरों की रिपोर्ट
नोएडा अथॉरिटी की तरफ से ईओडब्लू को बिल्डरों की रिपोर्ट भेजी गई इनमें किंडले इंफ्राहाइट्स लिमिटेड, आईवीआई प्राइम, असोटेक कांट्रेक्ट्स लिमिटेड, अंतरिक्ष डवलपर एंड प्रमोटर्स, टूडे होम्स नोएडा लिमिटेड, लॉजिक्स सिटी डवलपर्स,जीएसएस प्रोकॉन, ग्रेनाअट गेट प्राइवेट लिमिटेड, ग्रेनाइट,शुभकामना बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड, , सनसाइन इंफ्रावेल लिमिटेड, सिक्का इंफ्रास्ट्क्चर लिमिटेड, महागुन रियल एस्टेट लिमिटेड, किडले इफ्राहाइट्स लिमिटेड,टीजीबी इफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के बारे में भी जानकारी अथॉरिटी को भेजी गई है.
क्या होगा अगला कदम!
अथॉरिटीके सूत्रों के अनुसार, जनवरी 2026 में चल रही इस प्रक्रिया के तहत कई अहम क़दम उठाए हैं. अगर बिल्डर समाधान नहीं निकालते, तो प्राधिकरण इन प्रोजेक्ट्स को अपने नियंत्रण में लेकर किसी अन्य डेवलपर के जरिए पूरा करा सकता है. इतना ही नहीं बिल्डरों और उनके निदेशकों के निजी और कंपनी खातों पर रोक लग सकती है.
