Iran crisis hits indian market: ईरान में राजनीतिक अस्थिरता, अमेरिकी सख्ती और भुगतान संकट के चलते भारतीय बासमती चावल सहित कृषि निर्यात बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जिससे निर्यातकों का पैसा अटका है और नए सौदे रुक गए हैं. हालात लंबे चले तो राइस मिलर्स, किसानों और चाय-कॉफी जैसे दूसरे कृषि कारोबारों को भी भारी नुकसान का खतरा है.

Iran crisis hits indian market: ईरान में बीते करीब दो हफ्तों से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज हैं. अमेरिका की सख्ती और राजनीतिक दखल ने स्थिति को और तनावपूर्ण बना दिया है. इसका असर अब सीधे भारत के कारोबार पर दिखने लगा है. खास तौर पर भारतीय बासमती चावल के निर्यात पर बड़ा झटका लगा है. कभी ईरान भारत से बासमती खरीदने वाला सबसे बड़ा देश हुआ करता था. अब उसकी स्थिति तीसरे नंबर तक गिर चुकी है. हालात ऐसे बने हुए हैं कि आने वाले समय में यह बाजार और कमजोर पड़ सकता है. कई भारतीय निर्यातकों की पेमेंट फंसी हुई है. बंदरगाहों पर भारी मात्रा में माल अटका है. इससे कारोबारियों की चिंता बढ़ती जा रही है.
नए सौदे करने में भी हिचक रहे हैं लोग
ईरान लंबे समय से भारत के कृषि उत्पादों का अहम बाजार रहा है. बासमती चावल के साथ-साथ चाय और दूसरे खाद्य उत्पाद वहां बड़ी मात्रा में भेजे जाते रहे हैं. लेकिन अब वहां के सर्वोच्च नेता के खिलाफ चल रहे आंदोलनों ने पूरा सिस्टम हिला दिया है. बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है. आयातकों की खरीद क्षमता कमजोर हुई है. भारतीय बासमती निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. कई सालों की मेहनत से बना बाजार धीरे-धीरे बिखरता नजर आ रहा है. व्यापारियों को डर है कि अगर राजनीतिक स्थिरता जल्द नहीं लौटी, तो नुकसान और गहरा होगा. भुगतान अटकने की वजह से नए सौदे करने में भी लोग हिचक रहे हैं.
आंकड़े बताते हैं कि ईरान भारत के लिए कितना बड़ा बाजार रहा है. साल 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब 8,897 करोड़ रुपये के कृषि उत्पाद भेजे. इसमें से 6,374 करोड़ रुपये की हिस्सेदारी सिर्फ बासमती चावल की रही. कुल बासमती निर्यात में ईरान का हिस्सा करीब 12.67 फीसदी था. विशेषज्ञों का मानना है कि अगले कुछ महीनों में यह आंकड़ा और नीचे जा सकता है. वजह साफ है. वहां महंगाई तेजी से बढ़ रही है. ईरान की मुद्रा रियाल की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार गिर रही है. इससे आयातकों की भुगतान करने की ताकत कमजोर हो गई है.
राइस मिल को बड़ा नुकसान होगा

अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा ऐलान ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है . उन्होंने ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25 फीसदी टैरिफ लगाने की बात कही है. इससे ईरान में कारोबार करने वालों की टेंशन और बढ़ गई है. भारतीय निर्यातकों को डर है कि अगर बासमती की सप्लाई लंबे समय तक रुकी रही, तो हरियाणा और पंजाब के राइस मिलर्स को बड़ा नुकसान होगा. इसका असर सीधे किसानों पर भी पड़ेगा. कीमतें गिरने का खतरा बढ़ जाएगा. कई खेप पहले से ही बंदरगाहों पर खड़ी हैं. भुगतान को लेकर कोई स्पष्टता नहीं है.
इंडियन राइस एक्सपोर्टर फेडरेशन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2025-26 में अप्रैल से नवंबर तक भारत ने ईरान को करीब 5.99 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल भेजा है. यह पिछले साल की इसी अवधि से ज्यादा है. हालांकि दिसंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच हालात बिगड़ने का अनुमान है. अस्थिर माहौल में आयात करना जोखिम भरा हो गया है. इसी वजह से निर्यातकों के लिए एक एडवाइजरी जारी की गई है. केवल बासमती ही नहीं, बल्कि चाय निर्यातक भी परेशान हैं. साल 2024-25 में भारत ने ईरान को करीब 11 हजार टन चाय भेजी थी. इसके अलावा कॉफी, फल, मसाले, डेयरी उत्पाद, दालें और चीनी का कारोबार भी प्रभावित हो सकता है. कारोबार से जुड़े लोग अब बस यही उम्मीद कर रहे हैं कि ईरान में हालात जल्द सुधरें और बाजार फिर से पटरी पर लौटे.
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