उत्तराखंड राज्य में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू है. प्रदेश में UCC लागू होने के बाद में शादी के रजिस्ट्रेशन को लेकर लगातार जागरूकता दिख रही है. उत्तराखंड में UCC लागू होने के लगभग 6 महीनों के अंदर ही शादी के रजिस्ट्रेशन की संख्या में 24 गुना तक बढ़ोतरी दिखी है.
शादी के रजिस्ट्रेशनों में 24 गुना बढ़ोतरी
उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद में शादी के रजिस्ट्रेशन को लेकर लगातार जागरूकता दिख रही है. प्रदेश में UCC लागू होने के सिर्फ 6 महीनों के अंदर ही शादी के रजिस्ट्रेशन की संख्या में 24 गुना तक बढ़ोतरी दिखी है. रजिस्ट्रेशन के ये आंकड़े दिखाते हैं, कि राज्य के नागरिकों ने इस कानून को पूरी तरह से स्वीकार कर लिया है. उत्तराखंड में इस कानून को समाज में सुधार की दिशा में भी एक जरूरी कदम माना जा रहा है.
27 जनवरी 2025 को लागू हुआ UCC कानून
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य में समान नागरिक संहिता को लागू करने में बड़ी भूमिका निभाई है. उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य है जहां UCC को लागू किया गया है. साल 2022 में भाजपा ने विधानसभा चुनावों में अपने घोषणा पत्र में राज्य में UCC लागू करने का वादा जनता से किया था. जिसके बाद सरकार बनने के बाद जब मुख्यमंत्री धामी सत्ता में आए, तो पहली कैबिनेट बैठक में ही इसके ऊपर निर्णय लेते हुए इसका प्रोसेस शुरू हो गया था. जिसके बाद 27 जनवरी 2025 को उत्तराखंड में UCC कानून को लागू किया गया था.
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6 महीनों में 3 लाख से ज्यादा रजिस्ट्रेशन
प्रदेश में इस कानून के लागू होने के बाद में सबसे बड़ा असर शादी के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पर पड़ता दिख रहा है. आंकड़ों के मुताबिक 27 जनवरी 2025 से जुलाई 2025 तक 3 लाख से ज्यादा शादियों के रजिस्ट्रेशन दर्ज हुए. वहीं अगर इसे साल 2010 में पुराने विवाह पंजीकरण अधिनियम के मुकाबले देखा जाए, तो यह काफी ज्यादा है. पुराने अधिनियम के तहत राज्य में 15 सालों में कुल 3.30 लाख रजिस्ट्रेशन हुए थे. पुराने कानून में हर दिन लगभग 67 शादियों के रजिस्ट्रेशन होते थे, तो वहीं अब UCC लागू होने के बाद में 1634 रजिस्ट्रेशन प्रतिदिन हो गया है.
महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा
इस कानून को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि इस कानून ने सामाजिक जागरूकता को भी काफी हद तक बढ़ाया है. प्रदेश में लोग अब शादी को सामाजिक परंपरा में देखने के साथ-साथ कानूनी दायित्व में भी देखने लगे हैं. इस कानून से महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा हो रही है. UCC कानून में शादी, तलाक और लिव इन रिलेशनशिप जैसी चीजों को शामिल किया गया है. इस कानून में महिला और पुरुष दोनों के लिए शादी की एक उम्र को निर्धारित किया गया है. इसके साथ ही सभी धर्मों में तलाक की प्रक्रिया को भी एक समान बनाया गया है.
किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं UCC कानून- मुख्यमंत्री धामी
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि UCC कानून किसी भी समुदाय के खिलाफ नहीं है. उन्होंने बताया कि यह कानून सभी लोगों को एक समान अधिकार, सम्मान और अवसर देने का एक जरिया है. सीएम धामी का कहना है कि शादियों के रजिस्ट्रेशनों में आई बढ़त यह दिखाती है कि प्रदेश के लोगों ने इस कानून को स्वीकार कर लिया है.
