वाराणसी: जापान के यामानाशी प्रांत के गवर्नर कोतारो नागासाकी के नेतृत्व में एक उच्चस्तरीय जापानी प्रतिनिधिमंडल वाराणसी (काशी) दौरा है. इस डेलिगेशन में 240 लोग शामिल हैं. इस प्रतिनिधिमंडल में जापानी कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEOs), जाने-माने कारोबारी, शिक्षाविद और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं. यह दौरा वर्ष 2015 में जापान के तत्कालीन प्रधानमंत्री शिंजो अबे की काशी यात्रा के बाद भारत और जापान की पुरानी दोस्ती को एक नए मुकाम पर ले जाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. जिला व पर्यटन प्रशासन की ओर से मेहमानों का पारंपरिक आतिथ्य और भव्य स्वागत किया जाएगा. आइए जानते हैं दौरे के मुख्य आकर्षण और कार्यक्रम…
बौद्ध विरासत के दर्शन
जापानी मेहमान भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेशस्थली सारनाथ जाएंगे, जहां वे बौद्ध विरासत और ऐतिहासिक अवशेषों का अवलोकन करेंगे.शाम को प्रतिनिधिमंडल क्रूज पर सवार होकर नमो घाट और दशाश्वमेध घाट की विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती का दिव्य नजारा देखेंगे.दौरे के दौरान डेलिगेशन के कुछ सदस्य श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन भी करेंगे.
निवेश, रोजगार और टेक्नोलॉजी पर मंथन
उत्तर प्रदेश सरकार और जापानी कंपनियों के बीच कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने पर गंभीर चर्चा हुई है.यूपी और जापान के बीच सेमीकंडक्टर (Semiconductor), एमएसएमई (MSME), पर्यटन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र में निवेश बढ़ाने पर होगी चर्चा.इस दौरे से उत्तर प्रदेश में ‘बौद्ध सर्किट’, वेलनेस और सांस्कृतिक पर्यटन को बड़े पैमाने पर गति मिलेगी.जापानी कंपनियों और राज्य सरकार के बीच उत्तर प्रदेश के युवाओं के कौशल विकास (Skill Development) और रोजगार के नए अवसर पैदा करने पर सहमति बनी है.
दिखेगी काशी की समृद्ध कला
जापानी मेहमानों को काशी की सदियों पुरानी हस्तशिल्प परंपरा से जोड़ने के लिए विशेष रूप से ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) और जीआई टैग प्राप्त उत्पादों की एग्जीबिशन लगाई जाएगी. इसमें काशी की विश्व प्रसिद्ध गुलाबी मीनाकारी, सॉफ्ट स्टोन कार्विंग, लकड़ी के खिलौने और बनारसी सिल्क साड़ियों के लाइव स्टॉल्स शामिल होंगे. इसके अलावा कथक, लोकनृत्य और शास्त्रीय संगीत की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से काशी की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया जाएगा.
