IPAC ED raids: ईडी ने कोयला तस्करी से जुड़े हवाला लेन-देन की जांच में IPAC और प्रतीक जैन के कार्यालय पर छापेमारी की, जिसे ममता बनर्जी ने हार्ड डिस्क, पार्टी के आंतरिक व चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज, संवेदनशील संगठनात्मक डाटा और उम्मीदवारों की गोपनीय सूची, SIR का डेटा सहित लैपटाप, फोन व दस्तावेज चुराने का प्रयास बताया है.

IPAC ED raids: कोलकाता में राजनीतिक रणनीति फर्म IPAC और इसके प्रमुख प्रतीक जैन के कार्यालय पर ईडी ने छापेमारी की है. प्रवर्तन निदेशालय ने बताया कि यह कार्रवाई कोयला तस्करी से जुड़े करोड़ों रुपये के हवाला लेन-देन की जांच के लिए की गई है. जांच में सामने आया कि कोयला तस्करी से प्राप्त अवैध धन को हवाला ऑपरेटरों के जरिए कई लेवल में लेयर किया गया और इस पैसे का एक बड़ा हिस्सा IPAC को ट्रांसफर किया गया है. ईडी का कहना है कि इस मामले में कई सबूत और बयानों से हवाला नेटवर्क की पुष्टि हुई है.
ईडी ने IPAC के कोलकाता कार्यालय और प्रतीक जैन के आवास पर 8 जनवरी को पीएमएलए के तहत छापेमारी की है. जांच में पाया गया कि कोयला तस्करी से हुई कमाई का एक हिस्सा शाकंभरी ग्रुप ऑफ कंपनीज को बेचा गया था, जबकि हवाला ऑपरेटरों ने करोड़ों रुपये IPAC को भेजे हैं. एजेंसी का दावा है कि इस ट्रांसफर में वित्तीय और राजनीतिक दस्तावेज भी शामिल हो सकते हैं.
छापेमारी की खबर मिलते ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित घर पहुंच गई हैं. उन्होंने कहा कि यह कार्रवाई बीजेपी के इशारे पर हो रही है और इसका मकसद टीएमसी की चुनावी रणनीति जानना है. ममता ने आरोप लगाया कि केंद्रीय एजेंसी छापेमारी के दौरान हार्ड डिस्क, पार्टी के आंतरिक व चुनावी रणनीति से जुड़े दस्तावेज, संवेदनशील संगठनात्मक डाटा और उम्मीदवारों की गोपनीय सूची, SIR का डेटा सहित लैपटाप, फोन व दस्तावेज सब चुराकर व लूटकर ले गई है.

ममता बनर्जी ने बताया कि ईडी की फॉरेंसिक टीम ने IPAC के कंप्यूटर से डेटा ले लिया और कई वित्तीय व राजनीतिक दस्तावेज भी उनके कब्जे में आए हैं. उन्होंने इसे सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच नहीं बल्कि रणनीति चुराने की कोशिश करार दिया है. वहीं विपक्षी नेता सुवेंदु अधिकारी ने ममता की मौजूदगी को एजेंसी के काम में बाधा बताया और कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
IPAC पहले प्रशांत किशोर से जुड़ी थी और अब प्रतीक जैन इसका नेतृत्व कर रहे हैं. जैन IIT बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और टीएमसी की चुनावी रणनीति में अहम भूमिका निभाते हैं. फर्म ने 2019, 2021 और अन्य चुनावों में टीएमसी की रणनीति, नारे और उम्मीदवार चयन में जरूरी योगदान दिया है. ईडी की छापेमारी इस मामले की गंभीरता को दिखाती है और राजनीतिक हलकों में इसका असर लगातार महसूस किया जा रहा है.
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