कानपुर न्यूज: उत्तर प्रदेश के कानपुर में किडनी तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का भंडाफोड़ हुआ है. एसटीएफ, विजिलेंस और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने शहर के कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की. इस कार्रवाई से पूरे शहर में हड़कंप मच गया. बताया जा रहा है कि यह गिरोह लंबे समय से अवैध तरीके से किडनी ट्रांसप्लांट का धंधा चला रहा था. इस पूरे मामले में एक डॉक्टर दंपत्ति सहित कई दलालों को हिरासत में लिया गया है.सूत्रों के अनुसार, ये लोग गरीब और जरूरतमंद लोगों को पैसों का लालच देकर किडनी दान के लिए तैयार करते थे. इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के जरिए ट्रांसप्लांट कराया जाता था. प्रशासन ने साफ किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी.
निशान पर तीन अस्पताल
जांच एजेंसियों ने शहर के तीन प्रमुख अस्पताल आहूजा, मेड लाइफ और प्रिया हॉस्पिटल को निशाने पर लिया. इन अस्पतालों में संदिग्ध गतिविधियों की सूचना मिलने के बाद टीम ने दस्तावेजों और ऑपरेशन रिकॉर्ड की गहन जांच शुरू कर दी है.छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं.
लखनऊ से आते थे ‘काली सर्जरी’ करने वाले डॉक्टर
जांच में यह भी सामने आया है कि लखनऊ से कुछ डॉक्टर कानपुर आकर अवैध सर्जरी करते थे. इन सर्जरी को ‘काली सर्जरी’ कहा जा रहा है, जो पूरी तरह गैरकानूनी तरीके से की जाती थीं. इस खुलासे के बाद लखनऊ कनेक्शन की भी गहराई से जांच की जा रही है. जांच में इस नेटवर्क के तार उत्तराखंड और मेरठ से भी जुड़े पाए गए हैं. आशंका है कि यह गिरोह कई राज्यों में फैला हुआ है और बड़े स्तर पर मानव अंगों की तस्करी कर रहा था.
किडनी की कीमत 60 लाख, डोनर को मिलते थे सिर्फ 9 लाख
सूत्रों के मुताबिक, इस गिरोह द्वारा एक किडनी की कीमत करीब 60 लाख रुपये तक वसूली जाती थी, जबकि डोनर को मात्र 8 से 9 लाख रुपये ही दिए जाते थे. बाकी रकम दलालों और डॉक्टरों के बीच बांट ली जाती थी.
कई बड़े नाम आ सकते हैं सामने
फिलहाल STF, CMO और विजिलेंस की टीमें पूरे मामले की गहन जांच में जुटी हुई हैं. सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कई सफेदपोश और नामी डॉक्टरों के नाम भी इस मामले में सामने आ सकते हैं.
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