NEET UG Re-Exam: देशभर में लगभग 23 लाख और उत्तर प्रदेश के 60 जिलों में 3.5 लाख अभ्यर्थी आज नीट परीक्षा देंगे. यूपी के सभी केंद्रों पर एलआईयू और पुलिस बल मुस्तैद, अफवाह फैलाने वालों और सॉल्वर गैंग पर पैनी नजर है. बिना आधार बायोमेट्रिक और फेशियल रिकग्निशन के किसी भी छात्र को परीक्षा हॉल में प्रवेश की अनुमति नहीं है.
NEET UG Re-Exam: देश के सबसे बड़े मेडिकल एंट्रेंस एग्जाम NEET (UG)-2026 का आयोजन आज देश भर में बेहद कड़े और ऐतिहासिक सुरक्षा प्रबंधों के बीच शुरू हो रहा है. परीक्षा दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजकर15 मिनट तक होगी. प्रश्नपत्रों की गोपनीयता और परीक्षा की शुचिता को बनाए रखने के लिए इस बार केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने ‘शून्य सहिष्णुता’ की नीति अपनाई है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ समेत राज्य के करीब 60 जिलों में बनाए गए केंद्रों पर लगभग 3.5 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में बैठ रहे हैं, जबकि पूरे देश की बात करें तो लगभग 23 लाख परीक्षार्थी इस बेहद महत्वपूर्ण परीक्षा में अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.
यूपी में अभेद्य सुरक्षा चक्र
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर शासन ने सूबे के सभी केंद्रों पर थ्री-लेयर (त्रि-स्तरीय) सुरक्षा चक्र तैयार किया है. लखनऊ, नोएडा, वाराणसी और कानपुर जैसे बड़े केंद्रों पर स्थानीय पुलिस के साथ-साथ लोकल इंटेलिजेंस यूनिट (LIU) और क्रिमिनल इंटेलिजेंस टीमों को सादे कपड़ों में तैनात किया गया है. परीक्षा केंद्रों के आसपास की फोटोकॉपी दुकानों, साइबर कैफे और पुराने संदिग्धों पर निगरानी रखी जा रही है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की मॉनिटरिंग के लिए एक विशेष साइबर सेल को एक्टिव किया गया है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या भ्रामक संदेश फैलाने वालों पर तुरंत गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जा सके.
जैमर्स, एआई और बायोमेट्रिक से लैस हैं परीक्षा केंद्र
इस बार नीट परीक्षा के आयोजन में सबसे बड़ा बदलाव इसकी उच्च स्तरीय निगरानी व्यवस्था है. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या तकनीकी खामी को रोकने के लिए दिल्ली में एक अत्याधुनिक केंद्रीय कमांड कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है. खुद प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO), केंद्रीय गृह मंत्रालय और कैबिनेट सचिवालय की विशेष टीमें इस कंट्रोल रूम के जरिए पूरे देश के परीक्षा केंद्रों की लाइव गतिविधियों पर सीधे नजर बनाए हुए हैं. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने पेपर लीक और डमी कैंडिडेट (स्कॉलर) की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल किया है. देश भर के 95,000 से अधिक परीक्षा कक्षों में 1.38 लाख से ज्यादा सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक से लैस हैं और छात्रों के संदिग्ध व्यवहार पर खुद अलर्ट जेनरेट करेंगे.
परीक्षा केंद्रों पर इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड द्वारा निर्मित 51,000 से अधिक हाई-पावर जैमर्स लगाए गए हैं ताकि परीक्षा हॉल के भीतर 5G या ब्लूटूथ सिग्नल काम न कर सकें. छात्रों को मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद अनिवार्य रूप से आधार-आधारित बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, लाइव फोटोग्राफी और फेशियल रिकग्निशन से गुजरना पड़ रहा है, जिसके बाद ही उन्हें उनकी आवंटित सीट पर जाने दिया जाएगा.
