pakistan mediator us iran peace talks: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच संभावित शांति वार्ता के लिए एक प्रमुख मध्यस्थ के रूप में उभरा है, जिसे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का भी समर्थन मिला है. जनरल आसिम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को ईरान तक पहुँचाने में मदद की है और अब इस्लामाबाद इस तनाव को कम करने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय बैठक की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है.

pakistan mediator us iran peace talks: पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के बीच अब Pakistan एक नई भूमिका में नजर आ रहा है. जो देश कभी आतंकवाद और Osama bin Laden को पनाह देने के आरोपों के कारण अमेरिका से दूर हो गया था. वही देश अब अमेरिका और Iran के बीच संभावित बातचीत में अहम कड़ी बनता दिखाई दे रहा है. जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच शांति वार्ता की मेजबानी करने का प्रस्ताव भी दिया है. इस प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म “ट्रुथ सोशल” पर भी सामने रखा. इससे साफ संकेत मिला कि अमेरिका इस प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका को अहम मान रहा है.
बताया जा रहा है कि पाकिस्तान ने अमेरिका की एक 15 बिंदुओं वाली शांति योजना ईरान तक पहुंचाने में मदद की. यह संदेश सीधे नहीं बल्कि एक बैक-चैनल के जरिए भेजा गया था. इस घटनाक्रम को कई विशेषज्ञ अमेरिका और पाकिस्तान के रिश्तों में नए बदलाव के रूप में देख रहे हैं. खास बात यह है कि अपने पहले कार्यकाल के दौरान डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान को भरोसेमंद देश नहीं मानते थे. लेकिन अब वही अमेरिका इस मामले में पाकिस्तान पर भरोसा करता दिख रहा है.
इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान के सेना प्रमुख Asim Munir की भूमिका भी काफी अहम बताई जा रही है. कहा जा रहा है कि उन्होंने अमेरिका और पाकिस्तान के बीच संपर्क मजबूत करने में योगदान दिया. कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि मुनीर ने एक निजी कंपनी और पाकिस्तान सरकार के बीच क्रिप्टो से जुड़ी एक डील करवाने में मदद की थी. ट्रंप ने भी सार्वजनिक रूप से मुनीर की तारीफ करते हुए उन्हें अपना पसंदीदा पाकिस्तानी फील्ड मार्शल बताया था.
दूसरी ओर ईरान के भी पाकिस्तान के साथ रिश्ते सामान्य माने जाते हैं. हाल ही में ईरान ने पाकिस्तान के करीब 20 जहाजों को Strait of Hormuz से गुजरने की अनुमति दी. हालांकि ईरान ने अमेरिका के 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया. इसके बजाय उसने अपना पांच बिंदुओं वाला प्रस्ताव पेश किया. पाकिस्तान ने कहा है कि तनाव कम करने के लिए इस्लामाबाद में जल्द ही मध्यस्थ देशों की एक बैठक हो सकती है. इस बैठक में आगे की रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस पूरे घटनाक्रम में पाकिस्तान को राजनीतिक और कूटनीतिक फायदा हो सकता है. पाकिस्तान के पूर्व राजदूत Husain Haqqani का कहना है कि समझौता हो या न हो, पाकिस्तान की छवि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत हो रही है. वहीं पाकिस्तान को ईरान और Saudi Arabia के बीच संतुलन भी बनाए रखना पड़ रहा है. पहले भी अमेरिका और पाकिस्तान कई मुद्दों पर साथ काम कर चुके हैं. खासकर September 11 attacks के बाद आतंकवाद के खिलाफ अभियान में दोनों देशों के बीच सहयोग देखा गया था. अब मौजूदा हालात में पाकिस्तान फिर से खुद को अंतरराष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में लाने की कोशिश करता दिखाई दे रहा है.
