Ram Mandir Trust: राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से करोड़ों रुपये की कथित चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद अयोध्या में एक बहुत बड़ा प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकता है. सूत्रों के मुताबिक, बढ़ते विवादों के बीच ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ को भंग किए जाने की सरगर्मियां तेज हो गई हैं.हालांकि, ट्रस्ट को भंग करने या उसकी संरचना में किसी बदलाव को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है. इस संबंध में सरकार या संबंधित अधिकारियों की ओर से भी कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है.
वैष्णो देवी की तर्ज पर होगी व्यवस्था
इस बड़े बदलाव के तहत, राम मंदिर की पूरी व्यवस्था को ‘माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड’ की तर्ज पर पुनर्गठित किया जा सकता है. सीधा मतलब यह है कि मंदिर का प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्थाएं अब सीधे प्रशासन (सरकार) के नियंत्रण और देखरेख में जा सकती हैं, ताकि भविष्य में इस तरह के विवादों और वित्तीय गड़बड़ियों को पूरी तरह से रोका जा सके.
क्यों उठ रहे हैं ट्रस्ट को भंग करने के कदम?
पिछले कुछ दिनों में राम मंदिर के चढ़ावे में हेराफेरी के गंभीर आरोप सामने आए हैं, जिसके बाद एसआईटी (SIT) जांच और एफआईआर (FIR) तक की नौबत आ गई.इस मामले में आठ गिरफ्तारी भी हुई. इस विवाद के चलते ट्रस्ट के कई प्रमुख पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे थे. मंदिर की शुचिता, पारदर्शिता और सुरक्षा को बनाए रखने के लिए अब इस पूरी व्यवस्था का सरकारीकरण करने या श्राइन बोर्ड जैसा कड़ा ढांचा लागू करने पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है.वहीं, मामले की जांच और तथ्यों के सामने आने का इंतजार किया जा रहा है.
राम मंदिर ट्रस्ट का गठन कब हुआ था ?
अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण और प्रबंधन के लिए श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र नामक ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को किया गया था. पीएम मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी. यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2019 के ऐतिहासिक फैसले के बाद लिया गया था, जिसमें सरकार को मंदिर निर्माण के लिए एक ट्रस्ट बनाने का निर्देश दिया गया था.
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