Ram Mandir Donation Row SIT Investigation: सीएम योगी आदित्यनाथ ने राम मंदिर दान विवाद की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी है। लखनऊ के मंडलायुक्त भी इसमें शामिल किए गए हैं. समिति 7 दिन में प्रारंभिक और 15 दिन में अंतिम जांच रिपोर्ट सौंपेगी. इस समिति को बेहद कड़े निर्देश जारी किए गए हैं, जिसके तहत एसआईटी को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट महज 7 दिनों के भीतर और अंतिम (फाइनल) रिपोर्ट 15 दिनों के भीतर शासन को सौंपनी होगी.
ट्रस्ट के अनुरोध पर एक्शन
सूत्रों के अनुसार, श्री राम जन्मभूमि मंदिर ट्रस्ट द्वारा हाल ही में कुछ तकनीकी, प्रशासनिक या वित्तीय विसंगतियों (अथवा मंदिर से जुड़े विशेष विषयों) को लेकर शासन से एक स्वतंत्र और उच्च स्तरीय जांच की मांग की गई थी. मामले के महत्व और मंदिर की गरिमा को देखते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर गृह और वित्त विभाग ने समन्वय स्थापित कर तत्काल इस त्रि-स्तरीय एसआईटी का ऐलान कर दिया. वित्त विभाग के विशेष सचिव को शामिल किए जाने से यह साफ है कि जांच में दस्तावेजों और वित्तीय पहलुओं की बहुत ही बारीकी से ऑडिट और समीक्षा की जाएगी.
3 सदस्यीय SIT में शामिल हैं ये दिग्गज अधिकारी
इस बेहद संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल मामले की कमान शासन ने प्रदेश के तीन सबसे भरोसेमंद और वरिष्ठ प्रशासनिक व वित्तीय अधिकारियों के हाथों में सौंपी है:
1. विजय विश्वास पंत, IAS, मंडलायुक्त लखनऊ
2. किरन एस, IPS, आईजी रेज़
3. नील रतन , विशेष सचिव , वित्त
15 दिनों के भीतर अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट
शासन ने इस एसआईटी के लिए समय-सारणी बेहद सख्त रखी है ताकि जांच में किसी भी प्रकार का विलंब न हो. समिति आज से ही अपनी कार्यप्रणाली शुरू कर रही है. अगले 7 दिनों में अधिकारियों को मौके का मुआयना, संबंधित पक्षों के बयान और दस्तावेजों को खंगालकर एक अंतरिम/प्रारंभिक रिपोर्ट तैयार करनी होगी. फिर इसके ठीक बाद, सभी कड़ियों को जोड़ते हुए अगले 15 दिनों के भीतर अंतिम निष्कर्ष रिपोर्ट शासन के सम्मुख प्रस्तुत कर दी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की बड़ी दंडात्मक या सुधारात्मक कार्रवाई तय होगी.
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