हाल ही में फिलीपींस के मिंडानाओ में तेज भूकंप के झटके महसूस किए गए है. भूकंप की तीव्रता 7.8 के करीब थी. हालांकि, अभी तक वहां पर किसी तरीके की तबाही की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन भूकंप के झटके को देखते हुए सुनामी की चेतावनी जारी की गई है. इसी बीच उत्तराखंड के भू वैज्ञानिकों के बीच एक चिंता बढ़ते दिखाई दी है.
दरअसल, यहां के वैज्ञानिकों का कहना हैं कि उत्तराखंड की धरती के नीचे भी कुछ ऐसा ही हो रहा है, जो कि कभी भी तबाही मचा सकता है. दरअसल, हिमालयन जियोलॉजी के पूर्व भू-वैज्ञानिक ने रिपोर्ट में कहा हैं कि उत्तराखंड सेंट्रल सिस्मिक गैप वाले क्षेत्र में आता है. यह वह जगह हैं, जहां पर 200 सालों से 8 या उससे अधिक का भूकंप आया ही नहीं है. उन्होंने इसे राहत की बात नहीं बताई है. उनका कहना हैं कि यह तबाही अगर इतने सालों तक नहीं मची है, तो आने वाले समय में कभी भी मच सकती है.
भारतीय टेक्टोनिक हर वर्ष 4 से 5 सेंटीमीटर की तेजी से उत्तर की ओर जा रहा है, जिसकी वजह से वह यूरेशियन प्लेट से टकरा रहा है. यह टकराव कभी भी रुकता नहीं हैं, बल्कि जमीन के अंदर में ऊर्जा के रूप में जमा होता रहता है. जितनी जल्दी ऊर्जा बाहर निकलेगी उतना ही सही रहता है. वहीं, ज्यादा देर तक ऊर्जा के जमा होने पर बड़ा झटका लग सकता हैय.
तबाही की संभावना को देखते हुए केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान ने रुड़की के कई शहरों में मकानों और मिट्टी की जांच की. उन्होंने इस जांच में निर्माण सामग्री से लेकर हर एंगल की जांच की. नतीजे काफी डराने वाला था. दरअसल, रिजल्ट में 80 प्रतिशत भवन भूकंप की दृष्टि से काफी संवेदनशील थे. हर पांच में से चार मकान झटके में तुरंत ढह जाने वाले थे. पहाड़ी इलाकों में गेस्ट हाउस भरे हैं.
बता दें कि पिछले कई सालों में इन जगहों पर पर्यटकों की संख्या बढ़ गई है, जिसकी वजह से पूरा चेहरा बदल गया है. ऐसे में यह स्थिति भूकंप की स्थिति को और गंभीर बना रहे है. इसी स्थिति को देखते हुए उत्तराखंड की सरकार ने ‘भूदेव’ नामक एप डॉउनलोड किया है. यब भूकंप आने के 15 से 20 सेकंड पहले अलर्ट भेज देता है. इतने में गैस और लिफ्ट से बाहर आना जैसी चीजों को किया जा सकता है. लोगों से अनुरोध किया गया हैं कि वह सभी मानकों का पालन करें.
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