उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक दाई की लापरवाही के कारण नवजात बच्ची की गर्दन कटकर गर्भाशय के अंदर रह गई और शरीर बाहर आ गया. पुलिस ने मामले को दर्ज करके आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है.
दाई की लापरवाही से गर्भाशय में फंसी गर्दन
उत्तर प्रदेश से एक चौंकाने वाली खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में एक आशा कार्यकर्ता ने एक महिला को कमीशन के लालच के चलते एक प्राइवेट झोलाछाप दाई के पास भेज दिया. बताया जा रहा है कि आशा कार्यकर्ता ने प्रसव पीड़ा से तड़पने वाली महिला को एक झोलाछाप दाई के पास भेजा था, जिसके बाद उस दाई ने प्रसव के दौरान लापरवाही दिखाई. उसकी लापरवाही के चलते एक नवजात बच्ची की गर्दन गर्भाशय में फंस गई.
बेहतर इलाज का दिया झांसा
जानकारी के मुताबिक यह पूरा मामला बुलंदशहर के जहांगीराबाद क्षेत्र के रूठा गांव का है. यहां एक गर्भवती महिला और उसके परिजनों ने जब रूपवती नाम की एक आशा कार्यकर्ता से बात की, तो उसने अच्छे और बेहतर इलाज का झांसा देकर महिला और उसके परिजनों को गुमराह किया. आशा कार्यकर्ता गर्भवती महिला को नई बस्ती में मौजूद एक झोलाछाप दाई के पास लेकर पहुंच गई.
कैसे कटी मासूम की गर्दन?
पीड़ित महिला के परिजनों का आरोप है कि प्रसव को दौरान जब नवजात बच्ची का पैर बाहर की तरफ आया, तो दाई ने उसको उल्टा बताकर उसके साथ जबरदस्ती की. इसी दौरान किसी धारदार हथियार या फिर ब्लेड से नवजात बच्ची की गर्दन कट गई. इसके बाद उसके सिर अंदर रह गया और उस मासूम की तुरंत ही मौत हो गई. हालातों के बिगड़ने के बाद में दाई और आशा दोनों मौके से भागने लगे.
नवजात के शरीर को फेंकने की कोशिश की
जानकारी के मुताबिक दोनों से सबूतों को छिपाने के लिए नवजात बच्ची के शरीर को बोरे में बंद करके फेंकने की कोशिश भी की थी. हालांकि लोगों के इकट्ठा होने के बाद में दोनों बोरे को छोड़कर भाग गए. महिला के परिजनों ने तुरंत ही उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन हालातों को देखते हुए उसे मेरठ मेडिकल कॉलेज में रेफर कर दिया गया. पुलिस ने इस मामले में आशा कार्यकर्ता और दाई के खिलाफ संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है. पुलिस लगातार दोनों की गिरफ्तारी के लिए तलाश कर रही है.
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