देहरादून: प्राकृतिक आपदाओं और वर्षा जनित संकटों की दृष्टि से संवेदनशील उत्तर प्रदेश के पड़ोसी राज्य उत्तराखंड ने आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान दर्ज कराई है. भारत की अध्यक्षता में ओडिशा के पुरी में आयोजित ‘ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ (BRICS DRR) वर्किंग ग्रुप की द्वितीय तकनीकी बैठक में उत्तराखंड के आपदा प्रबंधन मॉडल की जमकर सराहना की गई. अधिकारियों ने विशेष रूप से ‘सिल्क्यारा टनल रेस्क्यू ऑपरेशन’ और ‘धराली आपदा प्रबंधन’ कार्यों को उत्तराखंड के सफल मॉडल के रूप में वैश्विक मंच पर सामने रखा. सम्मेलन में मौजूद अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इन अभियानों को कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में धैर्य, आधुनिक तकनीक, प्रशासनिक समन्वय और मानवीय संवेदनशीलता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया.
11 देशों के प्रतिनिधियों के सामने गूंजा ‘सिल्क्यारा रेस्क्यू’
तीन दिवसीय इस अहम बैठक में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका, मिस्र, इथियोपिया, ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इंडोनेशिया समेत 11 ब्रिक्स सदस्य व साझेदार देशों के वरिष्ठ अधिकारी और तकनीकी विशेषज्ञ शामिल हुए थे. इस सम्मेलन में उत्तराखंड की ओर से एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी (IPS) और यूएलएमएमसी के निदेशक शांतनु सरकार ने प्रतिनिधित्व किया.
तकनीक और बेहतर समन्वय की सराहना
प्रस्तुति के दौरान उत्तराखंड की भौगोलिक जटिलताओं, हिमालयी परिस्थितियों, भूस्खलन, अतिवृष्टि और ग्लेशियर झीलों से जुड़े जोखिमों को विस्तार से रखा गया. बैठक में उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की पूर्व चेतावनी प्रणाली और विभिन्न विभागों के बीच बेहतरीन तालमेल की विशेष सराहना की गई. एसडीआरएफ सेनानायक अर्पण यदुवंशी ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के संवेदनशील और सक्रिय दृष्टिकोण के कारण राज्य में जोखिम न्यूनीकरण, पूर्व तैयारी और एजेंसियों के बीच समन्वय को लगातार मजबूत किया जा रहा है. तो वहीं निदेशक शांतनु सरकार ने बताया कि भू-स्थानिक तकनीक, रिमोट सेंसिंग और डेटा एनालिटिक्स के उपयोग से भविष्य की आपदा चुनौतियों से निपटने में तकनीक आधारित समाधान निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं। ब्रिक्स मंच पर मिली यह सराहना उत्तराखंड की रेस्क्यू एजेंसियों के सतत प्रयासों को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय मान्यता है.
‘ब्रिक्स डिजास्टर रिस्क रिडक्शन (DRR) working group की बैठक में उत्तराखंड के मॉडल को मिली सराहना को राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। यह उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, एसडीआरएफ और अन्य एजेंसियों के सतत प्रयासों को मिली अंतरराष्ट्रीय मान्यता है.
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