woman reservation bill: संसद का विशेष सत्र शुरू हो गया है और लोकसभा में महिला आरक्षण को लेकर घमासान भी शुरू हो गया है. इस दौरान संसद में काफी हंगामा हुआ है. विपक्ष के कई नेताओं ने इस बिल का समर्थ किया है, लेकिन परिसीमन को लेकर ऐतराज जताया है.

संसद के विशेष सत्र में महिला आरक्षण बिल को लेकर काफी हंगामा हुआ है. विपक्ष के दलों के कई नेताओं ने इस दौरान अपनी बातें रखी हैं. इस दौरान कई नेताओं ने महिला आरक्षण का सपोर्ट किया, लेकिन इसी दौरान परिसीमन को लेकर काफी नाराजगी जताई है. इस दौरान संसद में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि हमारी पार्टी बिल के पक्ष में है, क्योंकि हमने हमेशा से ही महिलाओं को आगे बढ़ाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि लोहिया जी ने जेंडर और सोशल जस्टिस की बात की है, तो हम उनके सपोर्ट में हैं, महिलाओं के आरक्षण 33% दिया जाए हम उनके पक्ष में हैं.
बीजेपी सत्ता में रहने के लिए ऐसा कर रही- अखिलेश यादव
इस दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि बीजेपी इस बिल को सत्ता में रहने के लिए लाई है और अपने फायदे के लिए क्षेत्रों में बदलाव किया जा रहा है. महिला आरक्षण का सहारा लेकर परिसीमन के जरिए फिर से सत्ता पर कब्जा करने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि जिन्होंने नारी को अपने संगठन में भी नहीं रखा है तो मान सम्मान के लिए रखेंगे. उन्होंने कहा कि भारत में 21 जगहों पर बीजेपी की सरकार है, लेकिन 21 राज्यों में कितनी मुख्यमंत्री महिलाएं हैं और जो दिल्ली में हैं, वे हाफ मुख्यमंत्री हैं, उनके पास अधिकार कहां हैं?
चुनावी नक्शे को बदलने की साजिश- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने आगे कहा कि परिसीमन से चुनाव का नक्शा बदलने की साजिश की जा रही है. हम चाहते हैं कि मुस्लिम महिलाओं को आरक्षण मिले और ओबीसी महिलाओं को आरक्षण मिले. लेकिन इस बिल से आधी आबादी को पूरा अधिकार मिलेगा, यह किस तरह से पता लगेगा कि इसमें मुस्लिम और ओबीसी महिलाएं आएंगी? उन्होंने कहा कि बीजेपी सत्ता में फिर से आने के लिए यह बिल लेकर आई है.
बीजेपी के राज में महिलाएं परेशान- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने कहा कि लोकसभा में भाजपा की कितनी महिलाएं सदस्य हैं? सपा ने पंचायत में आरक्षण को लागू करने का काम किया. महिला आरक्षण लागू हो तो पार्टी सीट भी तय करे. महिला सीटों की संख्या तय की जाए न की क्षेत्र की. उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 600 सीटें होने वाली हैं इसके पीछे कोई साजिश तो नहीं है. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की 120 सीटें हो जाएंगी. बीजेपी के राज में महिलाएं बेहद परेशान हैं. उन लोगों की रसोई पूरी तरह से सूनी हो गई है.
परिसीमन को न जोड़ा जाए- गौरव गोगोई
इस बिल को लेकर गौरव गोगोई ने कहा कि कांग्रेस हमेशा महिला आरक्षण के पक्ष में है. सरकार महिला आरक्षण को सरल करे जिससे यह पारित होने के साथ में ही लागू भी हो जाए. उन्होंने कहा कि सरकार इसके साथ परिसीमन को न जोड़े. हमने पहले भी यह बात कही थी, कि जो काम आसानी के साथ हो सकता है उसे अटकाना क्यों है. अगर सरकार 2023 में हमारी बात को सुन लेती, तो महिला आरक्षण 2024 में ही लागू हो जाता.
यह बिल महिला विरोधी है- गोगोई
गौरव गोगोई में कहा कि महिला आरक्षण को सरकार संसद की वर्तमान 543 के साथ लेकर आए तो हम आपका पूरा सपोर्ट करेंगे. साल 2023 में मोदी सरकार ने कहा था कि जनगणना की जाएगी, परिसीमन होगा उसके बाद महिला आरक्षण को लागू किया जाएगा. अब सरकार कह रही है कि जनगणना से पहले ही महिला आरक्षण को लाने की कोशिश करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि यह बिल कुल मिलाकर महिला विरोधी है, जातिगत जनगणना और संविधान विरोधी है. इसी के साथ यह संघीय ढांचे का भी विरोधी है.
यह बिल महिलाओं का नहीं शासन करने का मुद्दा- ओवैसी
संसद में महिला आरक्षण बिल को लेकर ओवैसी का कहना है कि यह महिलाओं के लिए आरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि इसका मेन मकसद शासन करना है. उन्होंने कहा कि विधायिका से ओबीसी के प्रतिनिधित्व को खत्म करना है. यह पूरी तरह से संघवाद का उल्लंघन है. ओवैसी ने कहा कि इस बिल का मैं विरोध करता हूं. उन्होंने कहा कि अगर आबादी के मुताबिक लोकसभा की सीटों का बंटवारा दोबारा से शुरू होगा, तो यह संघवाद के बिल्कुल खिलाफ होगा.
इस दौरान ओवैसी ने कहा कि जिन राज्यों में जनसंख्या तेजी के साथ बढ़ रही है वहां पर सीटें भी बढ़ेंगी और ताकत भी बढे़गी. जिससे कम आबादी वाले राज्यों को नुकसान होगा. ओवैसी ने कहा कि दक्षिण भारत के राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण में काफी अच्छा काम किया है, लेकिन सीटों के नए गणित से उनकी हिस्सेदारी कम होगी, जिसके कारण उनकी आवाज कमजोर होगी.
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