बिहार में ठंड़ का प्रकोप काफी ज्यादा देखने को मिल रहा है. लोगों को अभी भी ठंड़ से राहत नहीं मिल रही है. इसके अलावा बच्चों की स्कूलों की छुट्टियों को भी इसी वजह से बढ़ाया गया था. मौसम वैज्ञानिकों ने संभावना जताई हैं कि जनवरी में बिहार में तापमान में और ज्यादा गिरावट दर्ज की जा सकती है.
लोग जहां पहले दोपहर में धूप निकलने के कारण थोड़ी राहत की सांस लेते थे. अब के समय में धूप न निकलने के कारण लोगों को और ज्यादा ठंड से परेशानी हो रही है. राज्य में तो सूर्य देव के दर्शन काफी दिनों से देखने को नहीं मिले हैं. मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि इस बार की सर्दी बीते दस सालों में सबसे ज्यादा देखने को मिल सकती है. इसके अलावा LA NINA इफेक्ट भी इस बार देखने को मिल सकता है. विभाग के अनुसार ऊत्तरी ध्रुव की ध्रुवीय ठंड़ी हवाओं में दरार पड़ी है, जिसकी वजह से ठंड़ी हवाओं में बढ़त देखने को मिली थी. इन्हीं वजहों से इस बार लोगों को शीतलहर का भी सामना करना पड़ रहा है. शीतलहर और कोहरे से लोग इतना परेशान है कि उनको दैनिक दिनचर्या के कामों को भी टालना पड़ रहा है.
शीतलहर के प्रकोप से दिखेंगे परेशान
हालांकि, सभी राज्यों में तापमान में काफी ज्यादा उतार-चढाव देखने को मिल रहा है. इसका कारण भारत के उत्तरी भाग (हिमालय) से आने वाली ठंड़ी और बर्फीली हवाएं है, जिसके कारण कोहरा और शीतलहर का प्रकोप इतना ज्यादा देखने को मिल रहा है. इन बर्फीली हवाओं से तापमान में इतनी गिरावट दर्ज की गई है. विभाग के अनुसार तापमान में पिछले कई सालों की तुलना में काफी गिरावट है.
बात करें इस साल के शुरूआत के तापमान की तो इस बार सबसे अधिकतम तापमान 1 और 2 जनवरी को देखा गया था. 1 जनवरी को अधिकतम तापमान 19.3 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया गया था और 2 जनवरी को 19.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था. इसी के साथ न्यूनतम तापमान 1 जनवरी को 8.2 डिग्री सेल्सियस के करीब दर्ज किया था. रात के समय तापमान में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई थी. 3 और 4 जनवरी को भी तापमान में भारी गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद थोड़े दिन के लिए तापमान में स्थिरता पाई गई थी.
