Dreaded Wild Elephant Terror: अखिलेश यादव ने एसआईआर ड्राफ्ट में गड़बड़ी और पीडीए के वोट काटने की आशंका जताई और चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है. उन्होंने वोटरों के अधिकार सुरक्षित रखने और निष्पक्ष चुनाव कराने पर जोर दिया है.

Dreaded Wild Elephant Terror: उत्तर प्रदेश में चुनाव को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को एसआईआर को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस की है. उन्होंने चुनाव आयोग से सीधे सवाल पूछे और पीडीए और बीजेपी के वोट को लेकर संदेह जताया है. अखिलेश ने कहा कि एसआईआर ड्राफ्ट में गड़बड़ी दिख रही है और इससे वोटरों के अधिकारों पर असर पड़ सकता है.
पहला सवाल करते हुए उन्होंने पूछा कि जब एक ही बीएलओ विधानसभा और पंचायत के लिए एसआईआर ड्राफ्ट तैयार कर रहा है, तो पूरे प्रदेश और ग्रामीण क्षेत्रों में 12.69 करोड़ वोटर कैसे हैं. उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र और प्रदेश की वोटर संख्या एक जैसी कैसे हो सकती है. यह आंकड़ा सवाल खड़ा करता है कि ड्राफ्ट में गड़बड़ी हो सकती है.
दूसरा सवाल में अखिलेश ने कहा कि विधानसभा में 2.88 करोड़ वोटर काटे गए हैं, जबकि पंचायत चुनाव में उन्हीं बीएलओ ने 40 लाख वोट जोड़ दिए हैं. उन्होंने पूछा कि क्या इसी तथ्य को छिपाने के लिए पंचायत चुनाव के मतदाताओं का फाइनल एसआईआर ड्राफ्ट 50 दिन लेट किया जा रहा है. यह विलंब भी आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठाता है.
तीसरे सवाल में अखिलेश ने चुनाव आयोग से पूछा कि दोनों एसआईआर में से कौन सा सही है. उन्होंने कहा कि दोनों आंकड़े साथ में सही नहीं हो सकते हैं. साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि अगर कोई कंपनी बीजेपी को चंदा देती है और उसी कंपनी ने चुनाव आयोग का ऐप बनाया है, तो आयोग निष्पक्ष कैसे हो सकता है. उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि वोटर लिस्ट को आधार कार्ड से जोड़ा जाना चाहिए.
अखिलेश ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि पीडीए के वोट काटने और बीजेपी के वोट बढ़ाने की साजिश हो रही है. उन्होंने एसआईआर ड्राफ्ट में अधिकारियों की लिस्ट सार्वजनिक करने और वोटरों को आधार से जोड़ने की मांग की है. उन्होंने यह भी बताया कि मुरादाबाद और देवरिया में एसआईआर सर्वे में मृत हुए बीएलओ के परिवार को आर्थिक सहायता दी गई है. उन्होंने सीएम योगी के बयान और एसआईआर ड्राफ्ट में कटौती को लेकर भी सवाल उठाए और आयोग की विश्वसनीयता पर चिंता जताई है.
अखिलेश का कहना है कि अगर गड़बड़ी की आशंका सच साबित होती है, तो यह लोकतंत्र के लिए बड़ा खतरा है. उन्होंने चुनाव आयोग से निष्पक्ष और पारदर्शी कार्रवाई की मांग की है.
