जल्द ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने नए ऑफिस में शिफ्ट होने वाले हैं. उम्मीद है कि खरवास खत्म होते ही यानी 14 जनवरी के बाद कभी भी प्रधानमंत्री नए ऑफिस से काम शुरू कर सकते हैं.
प्रधानमंत्री का नया ऑफिस सेंट्रल विस्टा रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो दिल्ली के केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र को आधुनिक बनाने का एक बड़ा प्रोजेक्ट है. यह प्रोजेक्ट 2019 में शुरू हुआ था और 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है. नया ऑफिस, जिसे पहले एक्जीक्यूटिव एनक्लेव कहा जाता था, अब ‘सेवा तीर्थ’ नाम से जाना जाता है. यह एक आधुनिक कॉम्प्लेक्स है जो प्रधानमंत्री कार्यालय , कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट को होस्ट करेगा.
कहां है पीएम का नया ऑफिस?
नया ऑफिस दिल्ली के रायसीना हिल के पास है, जो साउथ ब्लॉक के दक्षिण में है। यह सेंट्रल विस्टा के 3 किलोमीटर लंबे इलाके में आता है, जो राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैला हुआ है. यह कॉम्प्लेक्स लगभग 15 एकड़ जमीन पर फैला हुआ है और इसमें 10 चार-मंजिला इमारतें होंगी, जिनकी अधिकतम ऊंचाई 12 मीटर होगी. यह जगह ऐतिहासिक साउथ ब्लॉक से पास है, लेकिन अब साउथ और नॉर्थ ब्लॉक को पब्लिक म्यूजियम में बदल दिया जाएगा, जिसका नाम ‘युगे युगेन भारत संग्रहालय’ होगा.
कैसा है प्रधानमंत्री का नया ऑफिस?
प्रधानमंत्री का नया ऑफिस सेवा तीर्थ कॉम्प्लेक्स में है जिसमें तीन मुख्य इमारतें हैं-
- सेवा तीर्थ 1- यह प्रधानमंत्री कार्यालय का मुख्य हिस्सा होगा, जहां पीएम का ऑफिस, स्टाफ और अन्य सुविधाएं होंगी.
- सेवा तीर्थ 2- कैबिनेट सेक्रेटेरिएट यहां स्थित होगा, जो पहले से ही ऑपरेशनल है.
- सेवा तीर्थ 3- नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट और नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर (एनएसए) अजीत डोभाल का ऑफिस यहां होगा.
यह कॉम्प्लेक्स आधुनिक डिजाइन का है, जिसमें कंटेम्परेरी वर्कस्पेस, सेरेमोनियल हॉल और हाई-लेवल मीटिंग्स के लिए इंडिया हाउस शामिल है. इमारतें सैंडस्टोन से बनी होंगी, जो सेंट्रल विस्टा की ऐतिहासिक थीम से मैच करती हैं, लेकिन अंदर से हाई-टेक सुविधाओं से लैस होंगी. इसमें पर्यावरण अनुकूल डिजाइन, पैदल चलने लायक पाथवे और पब्लिक एक्सेसिबल स्पेस होंगे. कुल मिलाकर, यह एक स्मार्ट प्रशासनिक केंद्र होगा.
इस ऑफिस में क्या है खास?
- सेवा की थीम- नाम ‘सेवा तीर्थ’ ही सेवा की भावना को दर्शाता है, जो सरकार की कार्यशैली में एक सांस्कृतिक और नैतिक बदलाव का प्रतीक है। यह सिर्फ एक ऑफिस नहीं, बल्कि एक ऐसा स्थान है जो राष्ट्रीय सेवा को बढ़ावा देगा.
- आधुनिक सुविधाएं- स्टेट-ऑफ-द-आर्ट कॉन्फ्रेंसिंग फैसिलिटी, जहां विदेशी मेहमानों के साथ हाई-लेवल वार्ताएं होंगी. इसमें मॉडर्न वर्कस्टेशन, सिक्योरिटी फीचर्स और एनवायरनमेंटल सस्टेनेबिलिटी पर फोकस है.
- ऐतिहासिक महत्व- 1947 के बाद पहली बार पीएमओ साउथ ब्लॉक से बाहर शिफ्ट हो रहा है. यह स्वतंत्र भारत की प्रगति का प्रतीक है, जहां पुरानी कोलोनियल इमारतों को म्यूजियम में बदलकर पब्लिक के लिए खोला जाएगा.
- सुरक्षा और एफिशिएंसी- कॉम्प्लेक्स में उन्नत सुरक्षा व्यवस्था, जैसे वीआईपी टनल और वॉचटावर (कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार), होंगे. यह प्रशासनिक कार्यों को अधिक कुशल बनाएगा, क्योंकि सभी प्रमुख ऑफिस एक ही जगह पर होंगे.
इस ऑफिस में क्या नया होगा?
- शिफ्ट का ऐतिहासिक कदम- 78 साल बाद पीएमओ का नया पता, जो साउथ ब्लॉक की पुरानी, स्पेस की कमी वाली इमारत से अलग होगा। नया कॉम्प्लेक्स स्पेस कंस्ट्रेंट्स और पुरानी इंफ्रास्ट्रक्चर की समस्याओं को दूर करेगा.
- इंटीग्रेटेड सिस्टम- पीएमओ, कैबिनेट और एनएससी एक ही एनक्लेव में, जो गवर्नेंस को तेज और सीमलेस बनाएगा.
- पब्लिक एक्सेस- पुराने ब्लॉक्स को म्यूजियम बनाने से जनता को ऐतिहासिक स्थलों तक पहुंच मिलेगी, जो पहले सीमित थी.
- सस्टेनेबल डेवलपमेंट- प्रोजेक्ट में ग्रीन स्पेस, पैदल पाथ और पर्यावरण अनुकूल निर्माण, जो पुराने स्ट्रक्चर्स से अलग है.
- अन्य हिस्से- सेंट्रल विस्टा में नया संसद भवन (2023 में उद्घाटित), कार्तव्य भवन (2025 में उद्घाटित) और वाइस प्रेसिडेंट एनक्लेव जैसे नए एलिमेंट्स शामिल हैं, जो पूरे इलाके को नया रूप देंगे.
प्रधानमंत्री कब शिफ्ट होंगे?
अभी बिल्डिंग के काम और इंटीरियर का अंतिम चरण पूरा हो रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जनवरी 2026 के अंत तक या इससे पहले शिफ्ट कर सकते हैं. कुछ सूत्रों ने मकर संक्रांति 14 जनवरी 2026 को शुभ मुहूर्त के रूप में बताया है, जो कल है. हालांकि, अगर कोई देरी हुई तो जनवरी के अंत तक शिफ्टिंग हो सकती है. यह शिफ्टिंग सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का एक महत्वपूर्ण माइलस्टोन होगा, और इसके बाद पीएम यहां से अपना दैनिक काम करेंगे.
कुल मिलाकर, सेवा तीर्थ न सिर्फ एक नया ऑफिस है, बल्कि भारत की आधुनिक गवर्नेंस का प्रतीक है, जो सेवा, दक्षता और इतिहास को जोड़ता है. यह प्रोजेक्ट पर्यावरण संरक्षण और प्रशासनिक सुधार पर फोकस करता है, जो आने वाले सालों में देश की राजधानी को और मजबूत बनाएगा.
