Holi 2026: होली का पर्व एकदम नजदीक है और देशभर में जहां होलिका दहन बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक माना जाता है, वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले का एक गांव है जहां पर होलिका दहन नहीं किया जाता है. कहते हैं ऐसा प्रण ग्रामीणों ने भोलेनाथ को बचाने के लिए लिया है. आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कहानी.
इस गांव में नहीं होता होलिका दहन
इस गांव के लोग मानते हैं कि गांव के बीचों-बीच स्थित प्राचीन शिव मंदिर में स्वयं भगवान शिव विराजमान हैं और उनकी उपस्थिति के कारण यहां होलिका दहन नहीं किया जाता. तो क्या भोलेनाथ को होलिका दहन से कोई परेशानी हो जाती है. आइये बताते हैं ग्रामीणों में क्या है मान्यता?
करीब पांच हजार साल पुरानी परंपरा
सहारनपुर शहर से करीब 50 किलोमीटर दूर नानोता क्षेत्र में बरसी गांवस्थित है. यहां के लोग 5,000 साल से चली आ रही परंपरा को निभा रहे हैं. गांव वालों का कहना है कि होलिका जलाने से भूमि गरम हो जाएगी, जिससे भगवान शिव के पांव झुलस सकते हैं. यही कारण है कि गांव में आज तक कभी होलिका दहन नहीं हुआ. गांव वालों का कहना है कि ऐसा उनके पूर्वज करते आए हैं और वो इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं. यह परंपरा सिर्फ एक मान्यता नहीं, बल्कि उनकी श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक है.
महाभारत काल से जुड़ा शिव मंदिर
गांव में स्थित पश्चिममुखी शिव मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसे महाभारत काल में दुर्योधन ने एक ही रात में तैयार कराया था. किंवदंतियों की मानें तो जब अगली सुबह भीम ने इस मंदिर को देखा, तो अपनी गदा से इसके मुख्य द्वार को पश्चिम दिशा में मोड़ दिया. तभी से ये कहा जाता है कि यह देश का इकलौता पश्चिममुखी शिव मंदिर है. मंदिर के पुजारी बताते हैं, कि यह मंदिर बहुत ही पवित्र स्थान माना जाता है. महाशिवरात्रि के दौरान हजारों श्रद्धालु यहां अभिषेक के लिए आते हैं, और नवविवाहित जोड़े भी भगवान शिव का आशीर्वाद लेने यहां पहुंचते हैं.
कहां करते हैं होलिका दहन?
बरसी गांव में भले ही होलिका दहन न हो, लेकिन यहां के लोग इस त्योहार की उमंग को कम नहीं होने देते. गांववालों की मानें तो ये लोग दूसरे गांव में होलिका दहन के लिए जाते हैं. हालांकि, रंगों का त्योहार हम अपने गांव में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाते हैं. बरसी गांव के लोगों का मानना है कि भगवान शिव की कृपा से यह परंपरा हमेशा बनी रहेगी. गांववाले इसे श्रद्धा और भक्ति से जुड़ी मान्यता मानते हैं और आने वाली पीढ़ियों तक इसे निभाने की बात कहते हैं.
डिस्क्लेमर यहां बताई गई सारी बातें धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. इसकी विषय सामग्री और एआई द्वारा काल्पनिक चित्रण का हम……समान होने का दावा या पुष्टि नहीं करता.
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