मिडिल ईस्ट में जारी जंग के बीच अब ब्रिटेन ने अमेरिकी सेना को अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की परमिशन दे दी है. ब्रिटेन ने ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर करने के लिए यह परमिशन दी है, जिन मिसाइलों का इस्तेमाल वह होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए इस्तेमाल करता है.
ब्रिटिश सैन्य बेस इस्तेमाल करेगी अमेरिकी सेना
मिडिल ईस्ट में जंग लगातार जारी है. अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान के ऊपर हमले कर रहे हैं. इसी जंग के बीच अब ब्रिटेन ने अपनी नीतियों में बदलाव किया है. ब्रिटेन ने ईरान के खिलाफ हमले करने के लिए अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की परमिशन अमेरिका को दे दी है. जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को डाउनिंग स्ट्रीट यानी ब्रिटिश प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस बात की पुष्टि की है.
कुछ समय पहले किया था इनकार
डाउनिंग स्ट्रीट ने पुष्टि की है कि होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाने वाले ईरान की मिसाइल ठिकानों को खत्म करने के लिए अमेरिकी सेना ब्रिटिश बेस का इस्तेमाल कर सकेगी. आपको बता दें कि कुछ समय पहले प्रधानमंत्री कीर स्टार्मटर ने इसी तरह के अनुरोध को टाल दिया था. उन्होंने उस दौरान कहा था कि ब्रिटेन सीधे तौर पर किसी भी बड़े युद्ध में शामिल होना नहीं चाहता है.
किन बेस का इस्तेमाल करेगा अमेरिका?
हालांकि ईरान ने जब खाड़ी देशों में ब्रिटेन के सहयोगियों पर हमला किया, तो उसके बाद ब्रिटेन ने अपना रुख बदल लिया है. अब अमेरिकी सेना ‘आरएएफ फेयरफोर्ड’ और हिंद महासागर में मौजूद ‘डिएगो गार्सिया’ बेस का इस्तेमाल कर सकेगी. एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्रिटिश सरकार ने यह कदम सामूहिक आत्मरक्षा के तहत उठाया है. सरकार के मुताबिक अमेरिकी सेना को यह परमिशन इसलिए दी गई है, जिससे वह ईरान की मिसाइल क्षमता को कमजोर कर सके.
कुछ समय पहले ट्रंप ने की थी आलोचना
आपको बता दें कि कुछ समय पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिटेन की आलोचना की थी और उसे निराश करने वाला सहयोगी बताया था. जिसके बाद अब ब्रिटेन ने अपने सैन्य बेस इस्तेमाल करने की परमिशन अमेरिकी सेना को दे दी है. ब्रिटेन के द्वारा तनाव को कम करने की अपील भी की गई है. डाउनिंग स्ट्रीट ने अपने बयानों में तनाव को तत्काल कम करने और युद्ध को खत्म करने की बातों पर जोर दिया.
