gavli loses bmc 2026 election: गैंगस्टर से नेता बने अरुण गवली की बेटी योगिता गवली को 2026 के बीएमसी चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है. वार्ड 207, बायकुला–चिंचपोकली से उन्होंने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत की थी, लेकिन मुकाबले में बीजेपी के रोहिदास लोखंडे ने उन्हें पीछे छोड़ दिया है. योगिता गवली अखिल भारतीय सेना के टिकट पर मैदान में उतरी थीं और जोरदार प्रचार भी किया है.

योगिता गवली के पिता अरुण गवली को मुंबई में ‘डैडी’ के नाम से जाना जाता है. वह भायखला इलाके की दगड़ी चॉल से निकले और 1990 के दशक में अपराध की दुनिया में नाम कमाया है. आर्थिक तंगी के कारण उन्होंने कम उम्र में पढ़ाई छोड़ दी थी और अपराध की ओर बढ़ गए है.
साल 2004 में गवली ने अखिल भारतीय सेना पार्टी बनाई और चिंचपोकली से विधायक बनकर राजनीति में कदम रखा है. हालांकि, 2008 में उन्होंने शिवसेना पार्षद कमलाकर जामसांडेकर की हत्या करवा दी, जिसके लिए उन्हें 2012 में आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है.
गवली लंबे समय से नागपुर सेंट्रल जेल में बंद थे, लेकिन 2025 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है. अब 77 वर्षीय गवली के राजनीतिक करियर की अगली कड़ी के रूप में उनकी बेटी योगिता ने चुनाव में भाग लिया है. उनके परिवार का मुंबई में काफी प्रभाव है, लेकिन राजनीतिक शुरुआत में उन्हें जीत नहीं मिली है.

बीएमसी चुनाव में हार के बावजूद योगिता गवली ने अपने राजनीतिक कदम को मजबूत बनाने की कोशिश की है. यह हार उनके परिवार के लिए एक सीख और आने वाले समय में रणनीति बदलने का मौका है. भविष्य में योगिता गवली का राजनीतिक रास्ता अब भी खुला हुआ है, और वह मुंबई की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश जारी रख सकती हैं.
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