आपने कई बार कैदी को जेल में और कैदी को कारागार में रखने के बार में सुना होगा. कई लोगों को लगता हैं कि यह दोनों बातें एक ही जैसी है. जेल और कारागार
एक ही एक होते हैं. हालांकि, ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दोनों एक दूसरे से काफी अलग होते हैं. आज हम आपको दोनों के बीच के अंतर के बारे में बताने वाले हैं. आइए जानते हैं.
बहुत बड़ा अंतर
दरअसल, जेल के रहने वाले कैदी थोड़े समय के लिए रखे जाने वाले होते हैं. वहीं, कारागार में रहने वाले कैदी सालों तक रहने वाले कैदी होते हैं. जेल में अकसर वह कैदी होते है, जिनके अपराध अभी तक सिद्ध नहीं हुए है. उनपर या तो मुकदमा चल रहा है. हालांकि, एक साल से कम सजा वाले अपराधी भी जेल में रखे जाते हैं. जेल प्रबंधन ज्यादातर स्थानीय जिला अधिकारी करते हैं.
कारागार का प्रबंधन बड़े स्तर पर
वहीं, कारागार का प्रबंधन केंद्र या राज्य सरकार द्वारा किया जाता है. साथ ही जेल में रहने वाले कैदियों को बिल्कुल सुविधा नहीं दी जाती है, लेकिन कारागार में सालों तक रहने वाले अपराधी होते हैं. इसी कारण से पुस्तकालय, शैक्षिक कार्यक्रम, व्यावसायिक प्रशिक्षण और पुनर्वास जैसी सुविधा देखने को मिलेगी.
कारागार में तीन स्तर पर कर्मचारी बांटे
कारागार में अपराधियों को तीन स्तर पर बांटा जाता है. यानी की कारागार में सबसे ज्यादा खुली जेल अच्छे व्यवहार रखने वाले अपराधी को मिलती है. वहीं, सबसे खतरनाक कैदी को उच्च सुरक्षा वाले कारागार में रखा जाता है. मध्य वर्ग वाले कारागार में कम हिसंक अपराधियों को रखा जाता है.
ये भी पढ़ें: नोएडा में श्रमिक आंदोलन हुआ उग्र: गाड़ियों में लगाई आग, प्रदर्शन बेकाबू
