28 जनवरी दिन बुधवार को एक दुखद घटना सामने आ रही है. दरअसल, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का प्लेन क्रैश होने के कारण मौत हो गई. 3 लोग भी उनके साथ मौके पर थे, जिनकी मौत हो गई है. अधिकारियों ने इस घटना की जानकारी दी है. घटना की जानकारी देते हुए बताया कि यह घटना तब हुई जब उनका विमान पुणे में स्थित बारामती में उतर चुका था. इनकी मौत के बाद पूरे महाराष्ट्र में गम का माहौल है. वहां की सत्ता में अजीत पवार का नाम काफी जाना पहचाना है. विरासत में जरूर उन्हें राजनीति मिली थी लेकिन अपने दम पर लोगों के बीच राजनीति में पहचान बनाई थी.
जानें कौन थे अजित पवार
अजित पवार महाराष्ट्र की राजनीति का अहम हिस्सा रहे हैं. राजनीति में कदम रखने से पूर्व वह सहकारिता आंदोलन से जुड़े हुए थे. आइए एक झलक अजित पवार के जीवन पर डालें. अजित पवार जो कि शरद पवार के भतीजे थे. उनका जन्म 22 जुलाई 1959 को हुआ था. 1991 में अजित पवार को बारामती के सांसद के रूप में चुना गया था. हालांकि, अजित पवार ने काफी जल्दी राजनीति में एंट्री मार ली थी. जब वह 23 वर्ष के थे. तब ही उन्होंने राजनीति में कदम रख लिया था. अजीत पवार 1991 में पुणे सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक के अध्यक्ष और कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्री के सदस्य बन चुके थे. 16 साल तक उन्होंने इस पद को संभाला था. बता दें कि इन्हीं सालों में पहली बार संसदीय चुनाव में भाग लेकर उन्होंने जीत हासिल की थी.
1995 में विधानसभा चुनाव लड़ा
बारामती सीट से उन्होंने 1995 में विधानसभा चुनाव लड़ा और उस पर अपने विजय का झंडा फहराया था. इसके बाद उन्होंने जनता का दिल इतना ज्यादा जीत लिया कि उस सीट से उन्हें उठाना बिल्कुल न मुमकिन सा हो गया था. करीब 7 बार उन्होंने इस सीट पर जीत हासिल की थी. उन्होंने राज्य की राजनीति में इसी सीट से अपने कदम जमा लिए और लोगों के बीच अपने भरोसे को कायम रखा था.
इस समय बने वह उपमुख्यमंत्री
2010 में अजीत पवार पहली बार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री बने थे. उन पर वित्त, सिंचाई जैसे विभाग थे, जिसके जरिए वे राज्य के फैसलों में जुड़े रहते थे. सिंचाई और बजट के फैसलों में उनकी भूमिका काफी ज्यादा रही थी.
वह शरद पवार को अपना राजनीतिक का गुरु समझते थे. राजनीति की बात करें उन्हें कैसे सत्ता में रहना है कैसे क्या करना है. इसकी पूरी शिक्षा उन्होंने शरद पवार से ली थी. बाद में लेकिन धीरे-धीरे उनकी सोच में फर्क दिखने लगा था, जिसकी वजह से उन्होंने चाचा का हाथ छोड़ दिया. उन्होंने नया कदम उठाया जो उनके लिए काफी जोखिमों भरा हुआ था.
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