महाराष्ट्र के लातूर जिले में एक बुजुर्ग महिला ने अपने ही पोतों के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ी. जिसके बाद जमीन को वापस से हासिल कर लिया. कोर्ट ने जमीन दोबारा से महिला को सौंप दी है.

दादी ने लड़ी पोतों के खिलाफ लड़ाई
महाराष्ट्र के लातूर जिले से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है. यहां एक 89 साल की बुजुर्ग महिला ने अपने पोतों के खिलाफ कानूनी लड़ाई को जीतकर अपनी साढ़े 7 एकड़ जमीन को दोबारा से हासिल कर लिया. महिला ने आरोप लगाया कि जमीन को अपने नाम करवाने के बाद दोनों पोतों ने दादी की देखभाल करना बंद कर दिया था. जिसके बाद बुजुर्ग ने सीनियर सिटिजन का दरवाजा खटखटाया था.
पोतों को सौंपी थी जमीन
मामले की सुनवाई के बाद गिफ्ट डीड रद्द कर दी गई. जिससे जमीन का अधिकारी फिर से बुजुर्ग महिला को मिल गया. अब यह मामला चर्चा का विषय बन गया है. आपको बता दें कि यह पूरा मामला लातूर जिले के करसा गांव का है. यहां एक बुजुर्ग महिला ने अपनी साढ़े 7 एकड़ खेती को अपने पोतों के नाम कर दिया था. उन्होंने यह जमीन एक रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड के जरिए सौंपी थी.
देखभाल करना किया बंद
जमीन नाम होते ही दोनों पोतों ने बुजुर्ग की देखभाल करना और उन्हें दवाई-खाना देने से मना कर दिया. जब सारी हदें पार हो गईं, तो पीड़िता हौसाबाई ने हिम्मत दिखाई और उन्होंने ट्रिब्यूनल में कानूनी न्याय की गुहार लगाई. जिसके बाद इस मामले की सुनवाई हुई और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि अगर कोई संपत्ति बुजुर्गों की देखभाल करने के वादे पर ट्रांसफर की जाती है, तो देखभाल करना एक कानूनी शर्त बन जाती है.
कोर्ट ने दिया सख्त आदेश
सुनवाई के बाद अदालत ने रजिस्टर्ड गिफ्ट डीड को रद्द कि और राजस्व रिकॉर्ड से पोतों के नामों को हटाने का आदेश दे दिया. जिसके बाद अब हौसाबाई को जमीन का मालिकाना हक दोबारा से मिल गया है. अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि आगे भविष्य में इस जमीन पर बुजुर्ग महिला के काम में किसी भी तरह की कोई बाधा नहीं होनी चाहिए. साथ ही यह आदेश भी अदालत ने जारी किया है कि इस दौरान जमीन से मिले सरकारी लाभ, सब्सिडी और फसलों का पैसा भी पोतों को वापस करना होगा.
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