Lucknow Green Corridor: राजधानी लखनऊ को शुक्रवार को यातायात की नई रफ्तार मिलने जा रही है. लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की महत्वाकांक्षी ग्रीन कॉरिडोर परियोजना का लोकार्पण आज होने जा रहा है. इस अवसर पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह मुख्य अतिथि होंगे, जबकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी कार्यक्रम में शामिल होंगे.13 मार्च को दोपहर 04:30 बजे झूलेलाल वाटिका में आयोजित एक भव्य समारोह में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संयुक्त रूप से इस महत्वाकांक्षी परियोजना जनता को समर्पित करेंगे.
तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कामों का शिलान्यास
इस शिलान्यास के साथ परियोजना के तीसरे और चौथे चरण के निर्माण कामों का शिलान्यास भी किया जाएगा. ये ग्रीन कॉरिडोर 1519 करोड़ की लागत से तैयार किया गया है.
मिलेगी भीषण जाम से राहत
एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार के मुताबिक 100 करोड़ की लागत से ग्रीन कॉरिडोर परियोजना के पहले फेस का लोकार्पण 11 मार्च 2024 को किया गया था. 6.8 किमी लंबा ये पुल आईआईएम रोड से पक्का पुल तक बना था. 13 मार्च 2026 को परियोजना के द्वितीय चरण का लोकार्पण किया जाएगा. इस चरण के अंतर्गत डालीगंज से लेकर निशातगंज होते हुए समता मूलक चौक तक का हिस्सा आता है.करीब 7 किलोमीटर लंबे इस पुल के खुलते ही हजरतगंज, डालीगंज और निशातगंज जैसे घनी आबादी वाले और व्यस्ततम क्षेत्रों में लगने वाले भीषण जाम से बड़ी राहत मिल जाएगी. इससे लोगों का यात्रा समय भी घटेगा और आवागमन अधिक सुविधाजनक होगा
मिनटों में घंटों का सफर
ग्रीन कॉरिडोर के शुरू होने से शहर की यातायात व्यवस्था तेज होगी. पहले जिस दूरी को तय करने में घंटों लगते थे, वो अब मिनटों में पूरी की जा सकेगी. बिना किसी सिग्नल की बाधा के वाहन चालक सीधे रिवर फ्रंट के किनारे से गोमतीनगर और समता मूलक चौक तक पहुंच सकेंगे. इस परियोजना से करीब 5 लाख अधिक लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलेगा.
पुल पर छह लेन की सड़क
इस पुल पर छह लेन की सड़क बनाई गई है. 1220 करोड़ की लागत से 13 मार्च 2026 को ही इस परियोजना के तीसरे और चौथे चरण का शिलान्यास किया जाएगा, जो पिपराघाट से किसान पथ को जोड़ेगा.
पहला चौराहा- समता मूलक से आधा किलोमीटर आगे कुकरैल पुल की ओर बायीं तरफ बनाया गया है. दूसरा चौराहा पेपर मिल कॉलोनी के पास निशातगंज की तरफ तैयार किया गया है. यह सीधे हनुमान सेतु रोड से जुड़ा है. तीसरा चौराहा हनुमान सेतु पर बनाया गया है. यह पक्के पुल से कनेक्ट है. कॉरिडोर के निर्माण के दौरान रास्ते में आने वाले 166 पेड़ों को काटने के बजाय उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट किया गया है ताकि पर्यावरण संतुलन बना रहे.
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