Naseemuddin Siddiqui join SP: लखनऊ में रविवार को सपा मुख्यालय में सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया.
UP Politics: उत्तर प्रदेश की राजनीति के बड़े मुस्लिम चेहारा नसीमुद्दीन सिद्दीकी आज यानी 15 फरवरी को समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए हैं. लखनऊ में रविवार को सपा मुख्यालय में सपा मुखिया अखिलेश यादव की मौजूदगी में नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने सपा का दामन थाम लिया. नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने कुछ दिन पहले ही कांग्रेस छोड़ दी थी. नसीमुद्दीन सिद्दीकी के अलावा कई पूर्व विधायक और अपना दल (एस) के पूर्व अध्यक्ष की समाजवादी पार्टी में औपचारिक रूप से शामिल हुए.
कई नेताओं के साथ हुए साइकिल पर सवार
सूत्रों के मुताबिक, नसीमुद्दीन सिद्दीकी अकेले नहीं बल्कि अपने कई करीबी नेताओं और पूर्व विधायकों के साथ सपा में शामिल हुए. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने स्वयं उन्हें सदस्यता दिलाई. नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में आने के बाद पार्टी को एक मजबूत मुस्लिम नेता मिल गया है. आजम खां के लगातार जेल में रहने के बाद पार्टी के पास कोई जमीन से जुड़ा ऐसा कोई चेहरा नहीं था. राजनीतिक जानकारों के अनुसार इससे सपा को कुछ लाभ हो सकता है.
जानिए नसीमुद्दीन सिद्दीकी का राजनीतिक करियर
नसीमुद्दीन कभी कांशीराम के करीबी और मायावती सरकार के सबसे ताकतवर मंत्रियों में शुमार थे. बहुजन समाज पार्टी से अपना राजनीतिक करियर शुरू करने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी राजनीति में आने से पहले रेलवे में ठेकेदार थे. पश्चिमी यूपी पर उनकी अच्छी पकड़ है. कद्दावर नेता सिद्दीकी मायावती सरकार में रहते हुए कैबिनेट मंत्री बने. मायावती के करीबी बन वो पार्टी में चरम पर पहुंचे लेकिन जब वर्ष 2017 में जब मायावती ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया तो उन्हें लगा उनका प्रभाव इतना है कि वो अपनी पार्टी बना सकते है. उन्होंने अपनी पार्टी बनाई भी लेकिन फिर कुछ ही दिन बाद उन्होंने कांग्रेस का हाथ थाम लिया.
कांग्रेस ने पश्चिमी यूपी में अपना प्रभाव रखने वाले इस नेता को मुस्लिम चेहरे के रूप में प्रमोट किया. लेकिन जब 2024 के चुनाव में उन्हें तवज्जो नहीं मिली तो उन्होंने कांग्रेस का साथ भी छोड़ दिया क्योंकि वह 2027 के चुनाव के लिए पार्टी में अपने भविष्य को लेकर काफी परेशान थे.
कांग्रेस से दिया था इस्तीफा
नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने 24 जनवरी को कांग्रेस से इस्तीफा दिया था. नसीमुद्दीन कांग्रेस में प्रांतीय अध्यक्ष थे.
विधानसभा चुनाव 2027 से पहले समाजवादी पार्टी अपने कुनबे को मजबूत करने में जुटी है. नसीमुद्दीन सिद्दीकी जैसे कद्दावर नेता के आने से सपा को बुंदेलखंड और पश्चिमी यूपी में मुस्लिम वोटों के साथ-साथ बसपा के कैडर वोट में सेंधमारी करने में मदद मिल सकती है.
