BJP Organisational Reshuffle: 20 जनवरी 2026 को जगत प्रकाश नड्डा के बाद आधिकारिक रूप से कमान संभालने वाले भाजपा के सबसे युवा अध्यक्ष नितिन नवीन अब पूरी तरह से अपने एक्शन मोड में हैं.

Nitin Nabin New Team: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन में बड़े बदलाव की तैयारी है. 20 जनवरी, 2026 को राष्ट्रीय अध्यक्ष का कार्यभार संभालने के बाद नितिन नवीन अब अपनी नई टीम की घोषणा करने वाले हैं. माना जा रहा हा कि इस बार युवा चेहरों को मौका दिया जाएगा. जिससे अध्यक्ष और पदाधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल बनेगा. पार्टी सूत्रों के मुताबिक, विधानसभा चुनाव 2027 को देखते हुए उत्तर प्रदेश की इस टीम में 1 ब्राहम्ण, 1 ठाकुर, 1 वैश्य और 2 से 3 पिछड़े वर्ग के नेताओं को जगह दी जा सकती है. पार्टी जातिगत समीकरण साधने की कोशिश में है. राष्ट्रीय टीम के साथ-साथ यूपी की नई प्रदेश कार्यकारिणी का ऐलान भी जल्द हो सकता है.
राष्ट्रीय टीम में फेरबदल
अभी की बात करें तो बीजेपी की राष्ट्रीय टीम में यूपी से कई बड़े नाम है…..चुनावी राज्य यूपी के करीब 9 चेहरों को नितिन नवीन की राष्ट्रीय टीम में भेजने की तैयारी है. पूर्व मंत्री महेंद्र सिंह का नाम राष्ट्रीय टीम में जाने की चर्चा है. पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी को राष्ट्रीय टीम में जगह मिल सकती है. भाजपा एमएलसी विजय बहादुर पाठक को जगह मिल सकती है. अशोक कटारिया को भी जगह मिल सकती है. पुराने चहेरे में अरुण सिंह,रेखा वर्मा और राधा मोहन दास अग्रवाल को रिपीट किया जा सकता है.
यूपी से ये 9 बड़े दावेदार….
डॉ महेंद्र सिंह
हरीश द्विवेदी
अशोक कटारिया
अनूप गुप्ता
अमरपाल मौर्य
विजय बहादुर पाठक
श्रीकांत शर्मा
संतोष सिंह
अश्विनी त्यागी
यूपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के तौर पर उत्तर प्रदेश के तीन चेहरों सांसद रेखा वर्मा, सांसद लक्ष्मी कांत बाजपाई, विधान परिषद सदस्य तारिक मंसूर को बनाया था. राष्ट्रीय महामंत्रियों में सांसद अरुण सिंह और सांसद राधा मोहन अग्रवाल को शामिल किया गया था. राष्ट्रीय सह-संगठन महामंत्री के रूप में शिव प्रकाश और राजेश अग्रवाल को कोषाध्यक्ष, सांसद सुरेंद्र सिंह नागर को राष्ट्रीय सचिव बनाया गया था.
बीजेपी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल होने का मतलब है कि नेशनल लेवर पर पहचान. प्रदेश की राजनीति से निकलकर सीधे नेशनल पॉलिटिक्स. जब कोई नेता राष्ट्रीय टीम में शामिल होता है तो विधानभा या लोकसभा चुनावनों में टिकट बंटवारा और संगठन की नियुक्तियों में उनके सुझावों को सुना और समझा जाता है.
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