Destination Wedding in Uttarakhand: आजकल लोग शादी सिर्फ हॉल या फार्महाउस में नहीं करना चाहते. वे चाहते हैं कि शादी किसी ऐसी जगह पर हो जो सुंदर हो और दिल को सुकून दे. इसी वजह से उत्तराखंड शादी के लिए बहुत पसंद किया जाने लगा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2023 में उत्तराखंड ग्लोबल इन्वेस्टर समिट में ‘वेड इन इंडिया’ अभियान के तहत उत्तराखंड को डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए प्रोत्साहित किया था. उन्होंने अपील की थी कि अमीर परिवार अगले पांच सालों में कम से कम एक डेस्टिनेशन वेडिंग उत्तराखंड में करें, और अगर एक साल में 5,000 ऐसी शादियां हों तो राज्य वैश्विक वेडिंग हब बन सकता है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर और अर्थव्यवस्था को बड़ा फायदा होगा. तब से (जनवरी 2026 तक) उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग्स में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, हालांकि सरकारी या आधिकारिक स्रोतों से पूरे राज्य के लिए सटीक कुल संख्या उपलब्ध नहीं है. उपलब्ध डेटा और रिपोर्ट्स के आधार पर विस्तार से जानिए.
डेस्टिनेशन वेडिंग्स की कुल अनुमानित संख्या
मोदी की अपील के बाद 2024 और 2025 में उत्तराखंड में डेस्टिनेशन वेडिंग्स में 20-30% की वार्षिक वृद्धि देखी गई है. 2021-22 में राज्य में 400 से ज्यादा डेस्टिनेशन वेडिंग्स हुई थीं, जो मोदी की अपील से पहले का आंकड़ा है. 2024 में यह संख्या बढ़कर 600-800 के आसपास पहुंच गई, और 2025 में इससे ज्यादा होने का अनुमान है. हालांकि, पूरे राज्य के लिए आधिकारिक कुल आंकड़े नहीं मिले, क्योंकि ज्यादातर डेटा लोकेशन-विशिष्ट या अनुमानित है.
विशिष्ट लोकेशन्स में वृद्धि
त्रिजुगीनारायण मंदिर (रुद्रप्रयाग): यह शिव-पार्वती के विवाह स्थल के रूप में प्रसिद्ध है. 2025 में यहां अकेले 500 से ज्यादा शादियां हो चुकी हैं (मई 2025 तक के आंकड़े, जब रिपोर्ट प्रकाशित हुई)। प्रत्येक महीने पीक सीजन में 100+ शादियां हो रही हैं. मोदी की अपील से पहले यहां सालाना बहुत कम शादियां होती थीं, लेकिन अब यह ग्लोबल वेडिंग डेस्टिनेशन बन रहा है.
ऋषिकेश और मसूरी
2025 में ऋषिकेश के रिसॉर्ट्स में हर महीने दर्जनों शादियां हो रही हैं. दिल्ली-एनसीआर से आने वाले परिवार गंगा किनारे की शादियों को पसंद कर रहे हैं. मसूरी और देहरादून में ब्रैंडेड होटल रूम्स में 70% वृद्धि हुई है, ज्यादातर वेडिंग डिमांड से.
जिम कॉर्बेट और नैनीताल
यहां 2024-25 में 100+ शादियां रिपोर्ट हुई हैं, खासकर लग्जरी रिसॉर्ट्स में. टिवोली हॉस्पिटैलिटी ग्रुप ने अप्रैल 2025 में जिम कॉर्बेट में नया ‘वेडकेशन’ डेस्टिनेशन लॉन्च किया.
समग्र ट्रेंड
भारत में कुल शादियों का 26% अब डेस्टिनेशन वेडिंग्स हैं (2024 का आंकड़ा, 2022 में 18% था). हिल स्टेशन्स (जैसे उत्तराखंड और हिमाचल) में यह सेगमेंट 16.4% CAGR से बढ़ रहा है. उत्तराखंड इस ट्रेंड का बड़ा हिस्सा है, लेकिन सटीक राज्य-स्तरीय संख्या सरकारी रिपोर्ट्स में नहीं मिली. 2025 में उत्तराखंड वेडिंग अवॉर्ड्स आयोजित हुए, जो राज्य की बढ़ती लोकप्रियता दिखाते हैं.
पीएम ने उत्तराखंड को विंटर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट किया
मोदी की अपील, बेहतर कनेक्टिविटी (दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे, रोपवे प्रोजेक्ट्स), और राज्य सरकार की पॉलिसी (जैसे होमस्टे पॉलिसी, वेडिंग टूरिज्म प्रमोशन) ने वृद्धि को बढ़ावा दिया. नवंबर 2025 में मन की बात में मोदी ने फिर उत्तराखंड को विंटर वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में प्रमोट किया.
उत्तराखंड को मिला फायदा
डेस्टिनेशन वेडिंग्स से उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था को बहुआयामी लाभ हुआ है. यह न केवल टूरिज्म को बूस्ट करता है बल्कि लोकल कम्युनिटी को रोजगार और इनकम देता है. आइए जानते हैं विस्तार से….
आर्थिक फायदाप्रत्येक डेस्टिनेशन वेडिंग औसतन ₹30 लाख से ₹1.2 करोड़ तक खर्च करती है (100-300 मेहमानों के लिए). 2024-25 में उत्तराखंड में बढ़ती शादियों से अनुमानित ₹500-1000 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व आया है, जो टूरिज्म, हॉस्पिटैलिटी, और लोकल बिजनेस से आता है. पूरे भारत में वेडिंग इंडस्ट्री ₹6.5 लाख करोड़ की है (2025 सीजन), और उत्तराखंड इसमें बढ़ते शेयर का हिस्सा है.
टूरिज्म को मिला बूस्ट
शादियां विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देती हैं. आदि कैलाश यात्रा पर आने वाले 3 साल पहले 2,000 थे, अब 30,000+ हैं. शादियां अतिरिक्त टूरिस्ट लाती हैं, जो लोकल इकोनॉमी को मल्टीप्लायर इफेक्ट देती हैं (जैसे कैटरिंग, डेकोर, ट्रांसपोर्ट).
इनफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट
मोदी की अपील से नए रिसॉर्ट्स, होटल्स (देहरादून में 70% रूम इजाफा), और सुविधाएं बनीं। 55,000 नए होटल रूम्स भारत में जुड़े, जिनमें उत्तराखंड का बड़ा हिस्सा वेडिंग-केंद्रित है। यह ₹2 लाख करोड़ के प्रोजेक्ट्स से जुड़ा है.
रोजगार और लोकल बेनिफिट्स
शादियां लोकल आर्टिसंस, कैटरर्स, फोक परफॉर्मर्स, और सर्विस प्रोवाइडर्स को काम देती हैं. टियर-2/3 शहरों में 20-30% लागत बचत से पैसा लोकल इकोनॉमी में रहता है, जो MSMEs को बूस्ट करता है. उत्तराखंड में हॉर्टिकल्चर, हैंडीक्राफ्ट्स, और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स से जुड़े 10 मिलियन+ लोगों को फायदा.
कल्चरल और एनवायरनमेंटल इम्पैक्ट
शादियां लोकल फेस्टिवल्स (जैसे नंदा देवी मेला) को प्रमोट करती हैं. ‘वेड इन इंडिया’ से ₹1 लाख करोड़ की विदेशी खर्च भारत में रहता है, जिसका हिस्सा उत्तराखंड को मिलता है। हालांकि, वेस्ट मैनेजमेंट (80 लाख किलो सालाना वेडिंग वेस्ट) एक चुनौती है.
राज्य सरकार की भूमिका
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वेडिंग पॉलिसी बनाई, जो इंसेंटिव्स देती है. 2025 में उत्तराखंड विंटर गेम्स और होमस्टे पॉलिसी ने टूरिज्म को सपोर्ट किया. मोदी ने इसे ‘देवभूमि’ के रूप में प्रमोट किया, जिससे NRI और इंटरनेशनल क्लाइंट्स बढ़े. कुल मिलाकर, मोदी की अपील ने उत्तराखंड को वैश्विक वेडिंग मैप पर ला दिया, लेकिन सस्टेनेबल ग्रोथ के लिए वेस्ट और ओवरक्राउडिंग पर फोकस जरूरी है.
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