russia ukraine war: रूस-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की कोशिशों में तेजी आई है. पुतिन ने तीन अमेरिकी दूतों से मुलाकात की और अब पहली त्रिपक्षीय बैठक अबू धाबी में होगी. हालांकि कई मुद्दों पर मतभेद बने हुए हैं, खासकर क्षेत्रीय कंट्रोल और नाटो को लेकर, जिससे शांति समझौते की राह अभी आसान नहीं दिखती है.

russia ukraine war: अमेरिका की मध्यस्थता से रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे चार साल पुराने युद्ध को खत्म करने की कोशिशें तेज हो गई हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार रात तीन अमेरिकी दूतों से मुलाकात की है. क्रेमलिन ने इसकी साफ की है. अमेरिकी टीम में स्टीव विटकॉफ, जेरेड कुशनर और जोश ग्रुएनबाम शामिल थे. यह मुलाकात आधी रात से कुछ देर पहले हुई है.
यह बैठक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद हुई है. ट्रंप ने कहा था कि पुतिन और यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की दोनों समझौते की इच्छा जता चुके हैं. ट्रंप ने हाल ही में दावोस में जेलेंस्की से मुलाकात की थी. क्रेमलिन के मुताबिक बातचीत में रूस के विदेश नीति सलाहकार यूरी उशाकोव और विशेष दूत किरिल दिमित्रिएव भी मौजूद थे. इस मुलाकात का वीडियो भी जारी किया गया है.
बातचीत शुरू होने के कुछ देर बाद ही रूस ने अपनी सैन्य ताकत भी दिखाई है. रक्षा मंत्रालय ने बताया कि Tu-22M3 स्ट्रेटेजिक बॉम्बर विमानों ने बाल्टिक सागर के ऊपर पांच घंटे से ज्यादा उड़ान भरी है. उनके साथ रूसी फाइटर जेट भी थे. इसे रूटीन पेट्रोलिंग बताया गया है. इन विमानों का इस्तेमाल पहले यूक्रेन पर मिसाइल हमलों में हो चुका है. इससे बातचीत के बीच तनाव भी बढ़ता दिखा है.
ट्रंप लगातार इस युद्ध को खत्म करने पर जोर दे रहे हैं. उन्होंने कहा है कि अगर पुतिन और जेलेंस्की समझौता नहीं करते तो वे बेवकूफ होंगे. ट्रंप ने माना कि रूस-यूक्रेन युद्ध उनके लिए सबसे मुश्किल मुद्दा है. बातचीत के बावजूद कई अड़चनें बनी हुई हैं. पुतिन चाहते हैं कि यूक्रेन डोनेट्स्क का करीब 20 प्रतिशत हिस्सा छोड़ दे. जेलेंस्की ने इस मांग को खारिज कर दिया है. रूस यूक्रेन के नाटो में शामिल होने का भी विरोध कर रहा है.

अब पहली त्रिपक्षीय बैठक होने जा रही है. रूस, यूक्रेन और अमेरिका के प्रतिनिधि शुक्रवार को अबू धाबी में मिलेंगे. यह पहली बार होगा जब तीनों देश एक ही टेबल पर बैठेंगे. जेलेंस्की ने कहा है कि सुरक्षा गारंटी पर काम हो चुका है. लेकिन क्षेत्रीय नियंत्रण का मुद्दा अब भी अटका है. दुनिया की नजर अब इस बैठक पर टिकी है.
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