शरद पवार का समझ नहीं आता है कि वो किसके साथ हैं। शरद पवार कभी मोदी की तारीफ करने लगते हैं, तो कभी आलोचना करने लगते हैं। कभी आरएसएस की तारीफ करते नहीं थकते तो कभी बीजेपी की आलोचना करने लगते हैं, तो उनका समझ नहीं आता की वो किसकी तरफ हैं, एनडीए की तरफ हैं या इंडिया गठबंधन की तरफ हैं। अब उनका नया बयान सामने आया है जिसमें वो अभी इंडिया गठबंधन को एकजुट होने की बात करते हुए मोदी और बीजेपी पर तीखे हमले करते नजर आ रहे हैं। क्या ये उनका कोई रणनीतिक तरीका है। आइये समझते हैं द ट्रुथ 24 की इस खास रिपोर्ट में।

मोदी Vs नेहरू पर पवार ने जताई आपत्ति
एनसीपी के स्थापना दिवस के मौके पर शरद पवार ने मोदी की तुलना जवाहरलाल नेहरू से करने पर आपत्ति जताई थी, उन्होंने कहा कि मोदी लंबे समय तक निर्वाचित प्रधानमंत्री जरूर रहे हैं, लेकिन उनकी तुलना नेहरू के विजन से करना बिल्कुल भी उचित नहीं है, पवार ने कहा कि नेहरू ने देश की बुनियाद रखी। IIT, AIIMS, बड़े बांध, विज्ञान के संस्थान बनाए। मोदी का अपना काम है, लेकिन नेहरू की बराबरी नहीं हो सकती। ये बयान उस वक्त आया जब पवार इंडिया गठबंधन को मजबूत करने की बात कर रहे थे।
जब पवार ने की RSS और बीजेपी की तारीफ
शरद पवार ने अलग-अलग मौकों पर भारतीय जनता पार्टी और उसके नेताओं की प्रशासनिक क्षमता, चुनाव प्रबंधन और विदेश नीति की कई बार खुलकर तारीफ की है।
1 जनवरी 2025, महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद
एक पार्टी की बैठक में शरद पवार ने बीजेपी की जीत और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रबंधन की सराहना की। उन्होंने कहा कि बीजेपी और आरएसएस ने योजना बनाकर जमीन पर मजबूती से काम किया और हर घर तक पहुंचे। यही चुनाव में उनकी जीत का मुख्य कारण बना।
2 मई 2026, विदेश नीति की प्रशंसा
पुणे में एक कार्यक्रम में पवार ने दलगत राजनीति से ऊपर उठते हुए कहा कि भले ही उनके और पीएम मोदी के बीच राजनीतिक मतभेद हों, लेकिन वे अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की प्रतिष्ठा और सम्मान को बढ़ाने के लिए पूरे समर्पण से काम कर रहे हैं।
3 दिसंबर 2021, प्रशासनिक क्षमता की तारीफ
पुणे में एक कार्यक्रम के दौरान शरद पवार ने पीएम मोदी के काम करने के तरीके की तारीफ की। उन्होंने कहा था कि मोदी एक बार जो काम हाथ में लेते हैं, उसे पूरा करके ही दम लेते हैं और प्रशासनिक मामलों में उनकी मजबूत पकड़ है।
4 नवंबर 2014, अप्रत्याशित समर्थन
महाराष्ट्र में सरकार गठन के समय शरद पवार की पार्टी एनसीपी ने बीजेपी को बाहर से समर्थन देने की पेशकश की थी। हालांकि पवार ने बाद में इसे अपनी एक राजनीतिक रणनीति बताया था।
UPA सरकार में भी मोदी के साथ खड़े थे पवार
इनके अलावा अतीत में शरद पवार कई बार कह चुके हैं कि मनमोहन सिंह की यूपीए सरकार के दौरान भी, जब मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब वे मोदी के खिलाफ ‘बदले की राजनीति’ के खिलाफ थे, पवार ने कहा था कि मोदी एक चुने हुए जन-प्रतिनिधि हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। केंद्र सरकार को राज्यों के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए। उस वक्त भी पवार ने कांग्रेस के कई नेताओं से अलग लाइन ली थी।
INDIA गठबंधन में रहकर भी मोदी की तारीफ
तो शरद पवार इंडिया गठबंधन के पाले में रहने के बाद भी पीएम मोदी की तारीफ करना नहीं भूलते। जब विपक्ष के नेता मोदी पर हमलावर होते हैं, तब भी पवार बैलेंस बनाने की कोशिश करते हैं, कभी कहते हैं कि मोदी की विदेश नीति शानदार है। कभी कहते हैं कि चुनाव लड़ना बीजेपी से सीखना चाहिए। कभी कहते हैं कि मोदी 18 घंटे काम करते हैं। लेकिन अगले ही दिन जब मुद्दा किसानों का आता है, महंगाई का आता है, तो पवार बीजेपी पर तीखा हमला भी कर देते हैं।
अनप्रेडिक्टेबल हैं शरद पवार
शरद पवार की सियासत को समझना आसान नहीं है। 60 साल से ज्यादा के राजनीतिक करियर में उन्होंने हर रंग दिखाया है। वो कांग्रेस में रहे, कांग्रेस तोड़ी, फिर कांग्रेस से हाथ मिलाया। बीजेपी को समर्थन दिया, फिर सबसे बड़े विरोधी बने, पवार की सबसे बड़ी ताकत है उनका ‘अनप्रेडिक्टेबल’ होना। कोई नहीं जानता कि वो अगला कदम क्या उठाएंगे। जब सबको लगता है कि वो INDIA गठबंधन के साथ हैं, तब वो मोदी की तारीफ कर देते हैं। जब लगता है कि वो बीजेपी के करीब जा रहे हैं, तब वो नेहरू का जिक्र करके मोदी पर हमला कर देते हैं, दरअसल ये शरद पवार की पुरानी रणनीति है। वो हमेशा अपने विकल्प खुले रखते हैं। ना पूरी तरह NDA के साथ, ना पूरी तरह INDIA के साथ। महाराष्ट्र की सियासत में अपना वजूद बचाने के लिए वो बैलेंस बनाकर चलते हैं, बीजेपी की तारीफ करके वो अपने कार्यकर्ताओं को संदेश देते हैं कि हम भी सरकार के साथ काम कर सकते हैं। मोदी पर हमला करके वो विपक्षी एकता का चेहरा बने रहते हैं। आरएसएस की तारीफ करके वो हिंदू वोटरों को भी साधते हैं, एक्सपर्ट मानते हैं कि 84 साल की उम्र में भी शरद पवार किंगमेकर की भूमिका में रहना चाहते हैं। ना सरकार में, ना पूरी तरह विपक्ष में। बल्कि बीच में रहकर दोनों तरफ से मोलभाव करना, अब नया बयान जिसमें वो INDIA गठबंधन को एकजुट होने की बात कह रहे हैं, वो भी इसी रणनीति का हिस्सा है। 2029 के लोकसभा चुनाव अभी दूर हैं। तब तक पवार कभी मोदी की तारीफ करेंगे, कभी आलोचना, इसलिए सवाल बना रहेगा कि शरद पवार किसके साथ हैं। जवाब शायद खुद पवार भी नहीं देना चाहते। क्योंकि उनकी सियासत का सबसे बड़ा हथियार यही सस्पेंस है।
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