India board of peace invitation: डोनाल्ड ट्रंप के बोर्ड ऑफ पीस में शामिल होने के निमंत्रण पर भारत ने फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं दिखाई है, जबकि पाकिस्तान ने इसका खुला समर्थन किया है. कई विशेषज्ञ इस बोर्ड को लेकर सवाल उठा रहे हैं, ऐसे में भारत के लिए यह फैसला कूटनीतिक संतुलन और राष्ट्रीय हित से जुड़ा अहम मुद्दा बन गया है.

India board of peace invitation: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा संकट को लेकर बनाए गए नए अंतरराष्ट्रीय मंच बोर्ड ऑफ पीस में भारत सहित कई देशों को शामिल होने का निमंत्रण भेजा है. भारत, रूस, पाकिस्तान, तुर्की और कतर जैसे देशों को यह न्योता दिया गया है. हालांकि भारत इस प्रस्ताव पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया देने के मूड में नहीं दिख रहा है. दूसरी ओर पाकिस्तान ने इस निमंत्रण का खुले तौर पर स्वागत किया है और इसे विश्व शांति के लिए अहम कदम बताया है. इसी बीच खबर है कि फ्रांस इस बोर्ड में शामिल होने से इनकार कर सकता है. इससे इस पहल को लेकर दुनिया भर से पर अलग-अलग राय सामने आ रही है.
भारत में अमेरिका के राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बोर्ड में शामिल होने का न्योता देते हुए कहा कि यह मंच गाजा में स्थायी शांति लाने में मदद करेगा. इसके बाद देश में यह बहस शुरू हो गई है कि भारत को इसमें शामिल होना चाहिए या नहीं. सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत किसी भी फैसले से पहले सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करेगा. भारत यह भी देखना चाहता है कि अन्य बड़े देश इस निमंत्रण पर क्या रुख अपनाते हैं. इसलिए फिलहाल जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लिया जाएगा.
बोर्ड ऑफ पीस को समझें तो यह इजरायल और हमास के बीच पिछले साल हुए संघर्ष के बाद सामने आई ट्रंप की शांति योजना का हिस्सा है. अक्टूबर में हुए सीजफायर के बाद अब योजना के दूसरे चरण में इस बोर्ड का गठन किया जा रहा है. ट्रंप ने खुद को इस बोर्ड का अध्यक्ष घोषित किया है. इस बोर्ड का काम गाजा के अस्थायी शासन और पुनर्निर्माण से जुड़ा होगा. इसके लिए तकनीकी विशेषज्ञों की एक समिति बनाई गई है. ट्रंप इसे संयुक्त राष्ट्र के विकल्प के रूप में पेश कर रहे हैं और दावा कर रहे हैं कि यह दुनिया में शांति का सबसे मजबूत मंच होगा.

लेकिन कई अनुभवी विशेषज्ञ इस विचार से सहमत नहीं हैं. भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल का मानना है कि भारत को इस बोर्ड से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. उनके अनुसार यह पूरी व्यवस्था ट्रंप के नियंत्रण में होगी और बाकी देशों की भूमिका सीमित रह जाएगी. उन्होंने यह भी कहा कि इस पहल में संयुक्त राष्ट्र चार्टर की भावना का उल्लंघन होता दिखता है. साथ ही इसके साथ कारोबारी और निजी हित जुड़े होने की आशंका भी जताई जा रही है.
जियोपॉलिटिकल विशेषज्ञ ब्रह्म चेलानी ने भारत और पाकिस्तान को एक साथ आमंत्रित किए जाने पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे अमेरिका एक बार फिर दोनों देशों को एक ही स्तर पर रख रहा है. उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि बोर्ड ऑफ पीस भविष्य में टकराव का कारण भी बन सकता है. कुल मिलाकर भारत के सामने यह फैसला आसान नहीं है. उसे कूटनीतिक संतुलन, राष्ट्रीय हित और वैश्विक राजनीति को ध्यान में रखते हुए सोच-समझकर कदम उठाना होगा.
