Rahul Gandhi’s institution in danger: समाजवादी पार्टी में राहुल गांधी के खिलाफ ‘सब्सटेंटिव मोशन’ पार्टी का नोटिस दिया गया है, जिसमें उनकी सदस्यता रद्द करने और जांच की मांग की गई है. यदि प्रस्ताव स्वीकार हो जाता है, तो विशेष समिति जांच करेगी और उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई कर सकती है.

Rahul Gandhi’s institution in danger: राहुल गांधी की लोकसभा सदस्यता को लेकर एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने उनके खिलाफ लोकसभा में सब्सटैंटिव मोशन लाने का नोटिस दिया है. इस प्रस्ताव में राहुल गांधी की सदस्यता रद्द करने और उन्हें भविष्य में चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित करने की मांग की गई है. दुबे का कहना है कि राहुल गांधी के कथित आचरण की जांच कराई जानी चाहिए. इस कदम के बाद संसद में राजनीतिक माहौल और गर्म हो सकता है.
निशिकांत दुबे ने गुरुवार को कहा कि उन्होंने संसद में औपचारिक नोटिस दे दिया है. उनके अनुसार, यह प्रस्ताव राहुल गांधी के कथित अनैतिक व्यवहार की जांच के लिए लाया जा रहा है. उन्होंने मांग की है कि इस मामले की जांच एक विशेष समिति से कराई जाए. यह प्रस्ताव अब लोकसभा अध्यक्ष के पास जाएगा, जहां से आगे की प्रक्रिया तय होगी.
सब्सटैंटिव मोशन संसद की एक औपचारिक प्रक्रिया होती है. यह एक स्वतंत्र प्रस्ताव होता है, जिसे सदन की मंजूरी के लिए पेश किया जाता है. इसका उद्देश्य किसी मुद्दे पर सदन की राय लेना या कोई फैसला कराना होता है. कई बार ऐसे प्रस्तावों के जरिए किसी सांसद के आचरण की जांच के लिए समिति बनाने की मांग की जाती है. इस मामले में भी यही प्रक्रिया अपनाने की बात कही जा रही है.
संसदीय नियमों के मुताबिक, ऐसे प्रस्ताव को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष के पास होता है. सबसे पहले इसका नोटिस लोकसभा महासचिव को दिया जाता है. अगर अध्यक्ष इसे स्वीकार कर लेते हैं, तो सदन में इस पर चर्चा हो सकती है. इसके बाद प्रस्ताव को मतदान के लिए रखा जा सकता है. अगर सदन इसे पास कर देता है, तो आरोपों की जांच के लिए विशेष समिति बनाई जा सकती है.
यह समिति पूरे मामले की जांच करेगी और तय समय के भीतर अपनी रिपोर्ट सदन में पेश करेगी. रिपोर्ट आने के बाद फिर से चर्चा होगी. सदन तय करेगा कि समिति की सिफारिशों को मानना है या नहीं. अगर आरोप गंभीर पाए जाते हैं, तो सदस्यता खत्म करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है. इससे पहले भी राहुल गांधी के बयानों और भाषणों को लेकर संसद में कई बार विवाद हो चुका है. बीजेपी इन मामलों को गंभीर बताती रही है, जबकि कांग्रेस इसे राजनीतिक कार्रवाई कहती है.
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