China Semiconductor Policy: चीन चिप मैन्युफैक्चरिंग में आत्मनिर्भर बनने के लिए नया नियम लाने की तैयारी में है, जिसके तहत कंपनियों को कम से कम 50% घरेलू उपकरण इस्तेमाल करने होंगे. अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद तेज हुई इस नीति का असर अमेरिका, जापान और यूरोप की टेक कंपनियों पर पड़ सकता है.
China Semiconductor Policy: चीन एक बार फिर सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने जा रहा है. खबर है कि चीन सरकार अब चिप मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी कंपनियों के लिए नया नियम लागू करने की तैयारी में है. इस नियम के तहत कंपनियों को अपने प्लांट में इस्तेमाल होने वाले कम से कम 50 फीसदी उपकरण और सामान घरेलू यानी चीन में बने हुए ही लेने होंगे, माना जा रहा है कि यह फैसला अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे देशों के लिए चिंता बढ़ाने वाला है.
विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम
दरअसल, चीन लंबे समय से विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम करना चाहता है. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, जो भी चिप कंपनियां नए प्लांट लगाने या पुराने प्लांट का विस्तार करने के लिए सरकारी मंजूरी मांग रही हैं, उन्हें यह साबित करना होगा कि उनके आधे से ज्यादा उपकरण चीनी कंपनियों से खरीदे गए हैं. इसके लिए कंपनियों को टेंडर के जरिए दस्तावेज भी दिखाने होंगे. हालांकि, इस नियम को लेकर अभी तक चीन सरकार ने आधिकारिक घोषणा नहीं की है.
इस कदम की रफ्तार तब तेज हुई जब अमेरिका ने चीन पर तकनीकी प्रतिबंध सख्त कर दिए. साल 2023 में अमेरिका ने उन्नत एआई चिप्स और सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनों की चीन को बिक्री पर रोक लगा दी थी. इसके बाद चीन के सामने मुश्किल खड़ी हो गई, क्योंकि कई जरूरी उपकरण बाहर से ही आते थे. इसी वजह से चीन ने अपने स्तर पर चिप बनाने की योजना को तेजी से आगे बढ़ाया है.
विदेशी कंपनियों का दबदबा

50 फीसदी के इस नियम का असर यह हुआ है कि अब चीनी चिप निर्माता उन क्षेत्रों में भी घरेलू कंपनियों को चुन रहे हैं, जहां पहले अमेरिका, जापान, दक्षिण कोरिया और यूरोप की कंपनियों का दबदबा था. अगर कोई कंपनी तय शर्तें पूरी नहीं कर पाती, तो उसका आवेदन खारिज भी किया जा सकता है. हालांकि, जहां घरेलू उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, वहां कुछ छूट दी जा रही है.
सूत्रों के मुताबिक चीन की योजना यहीं रुकने वाली नहीं है. सरकार की प्राथमिकता आगे चलकर 50 फीसदी से भी ज्यादा घरेलू उपकरणों का इस्तेमाल कराने की है. अंतिम लक्ष्य यह है कि भविष्य में बनने वाले चिप प्लांटों में 100 फीसदी तक चीनी उपकरणों का ही उपयोग हो, साफ है कि चीन सेमीकंडक्टर की दुनिया में आत्मनिर्भर बनने के लिए पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है.
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