रात के तकरीबन 9:30 बज रहे थे। खबर आई कि शिवसेना के कद्दावर नेता एकनाथ शिंदे और उनके साथ करीब 11 से 12 विधायक मुंबई से गुजरात के सूरत के एक होटल में पहुंच गए हैं। कॉल करने पर सबके नंबर बंद आ रहे थे, तारीख थी 21 जून 2022, बगावत के बड़ा होने पर सूरत से शिंदे और उनके समर्थक विधायक असम के गुवाहाटी के होटल रेडिसन ब्लू के लिए रवाना हो गए, जिसके बाद एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनके पास शिवसेना के दो-तिहाई से अधिक विधायकों का समर्थन है, उस समय महाराष्ट्र के सीएम थे, बालासाहेब ठाकरे की सभाओं में उनकी फोटो क्लिक करने वाले उनके पर्सनल फोटोग्राफर और उनके बड़े बेटे उद्धव ठाकरे, इसके बाद ठाकरे परिवार के घर मातोश्री के एक शांत कमरे में कैमरा ऑन होता है, सोशल मीडिया और टीवी स्क्रीन्स पर फेसबुक लाइव के जरिए, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे जनता के सामने आते हैं, उनके चेहरे पर तनाव तो था, लेकिन एक अजीब सा ठहराव भी था। उन्होंने बात शुरू की, वह कोई आक्रामक राजनीतिक भाषण नहीं था, बल्कि एक भावुक संवाद था, उन्होंने बेहद शांत और संजीदा आवाज में कहा “जिन लोगों को मैंने सब कुछ दिया, वे ही आज मुझसे नाराज हैं। जिन्हें कुछ नहीं दिया, वे आज भी मेरे साथ चट्टान की तरह खड़े हैं, मुझे इस आंकड़ों के खेल में कोई दिलचस्पी नहीं है, मैं नहीं चाहता कि कल शिवसैनिक आपस में ही लड़ें या सड़कों पर खून बहे, सिर्फ इतना कहकर कैमरे की तरफ देखते हुए उद्धव ठाकरे ने एक ऐलान किया, “मैं मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे रहा हूं… और कैमरा बंद हो गया….
फिर वही कहानी, किरदार नए?
एक बार फिर महाराष्ट्र की राजनीति में फिर से वही घटना दोहराई जा रही है, 2022 में पहले विधायक गायब हुए थे, फिर सरकार चली गई थी। अब 2026 में उद्धव के सांसद दिल्ली पहुंच गए हैं, उनके फोन भी बंद आ रहे हैं, शिवसेना यूबीटी के 6 लोकसभा सांसद पिछले 48 घंटे से नॉट रीचेबल हैं, दिल्ली के एक होटल में उनकी मौजूदगी की खबर है। खबर ये भी है कि, एकनाथ शिंदे भी दिल्ली बूला लिए गए हैं, मुंबई में मातोश्री से लेकर शिवसेना भवन तक हलचल तेज है।
सांसदों की बगावत से उद्धव को कितना बड़ा खतरा?
2024 लोकसभा चुनाव में उद्धव ठाकरे की शिवसेना ने 9 सीटें जीती थीं। शिंदे गुट को 7 और बीजेपी को 9 सीटें मिली थीं, उद्धव के पास 9 में से अगर 6 सांसद भी टूट जाते हैं, तो एक बार फिर पार्टी का चुनाव चिन्ह और नाम खतरे में है, दलबदल कानून के तहत दो-तिहाई सांसद अगर अलग हो जाएं तो उनकी सदस्यता नहीं जाती, यानी 9 में से 6 सांसद और खबर है कि 6 सांसद पहले ही दिल्ली पहुंच चुके हैं, 2022 में विधायकों की बगावत से सरकार गई थी। 2026 में सांसदों की बगावत से पार्टी ही जा सकती है। उद्धव ठाकरे के लिए ये अस्तित्व की लड़ाई है।
मातोश्री में सन्नाटा क्या फिर होगा फेसबुक लाइव?
2022 में जब शिंदे गुवाहाटी में थे, तब उद्धव ने मातोश्री से फेसबुक लाइव किया था। भावुक अपील की थी, इस्तीफा दिया था। आज फिर मातोश्री में सन्नाटा है, संजय राउत दिल्ली में डैमेज कंट्रोल में लगे हैं। आदित्य ठाकरे कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। लेकिन उद्धव ठाकरे खामोश हैं। क्या वो फिर कैमरे के सामने आएंगे? क्या फिर कहेंगे कि “मुझे कुर्सी का मोह नहीं”? 2022 में सीएम की कुर्सी गई थी। 2026 में पार्टी का नाम-निशान जा सकता है। बालासाहेब की शिवसेना पहले ही दो फाड़ हो चुकी है। अब उद्धव की शिवसेना भी टूट गई तो ठाकरे परिवार के पास क्या बचेगा?
बीजेपी कर रही है 2029 की तैयारी?
2024 में महाराष्ट्र में महायुति की सरकार बनी। देवेंद्र फडणवीस सीएम हैं, एकनाथ शिंदे डिप्टी सीएम। लेकिन 2029 लोकसभा और विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी शिवसेना को पूरी तरह खत्म करना चाहती है, उद्धव के सांसदों को तोड़कर शिंदे गुट में मिला दो, तो शिंदे गुट असली शिवसेना बन जाएगा। चुनाव आयोग में केस मजबूत होगा। उद्धव के पास निशान रहेगा न नाम, यही हुआ था 2022 के बाद। विधायक टूटे, फिर नाम गया, निशान गया। अब सांसद टूट रहे हैं। स्क्रिप्ट सेम है, डायरेक्टर सेम है, बस एक्टर्स बदले हैं, 21 जून 2022 की रात सूरत से शुरू हुई बगावत ने उद्धव ठाकरे की कुर्सी छीन ली थी। 2026 की जून में दिल्ली से शुरू हुई हलचल उनकी पार्टी छीन सकती है, तब विधायक गायब थे, फोन बंद थे। आज सांसद गायब हैं, फोन बंद हैं। तब उद्धव ने कहा था, “जिन्हें सब दिया वो नाराज हैं।” आज भी वही हो रहा है। जिन्हें टिकट दिया, मंत्री बनाया, वो दिल्ली में डील कर रहे हैं, महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे नाम का मतलब होता था सत्ता। बालासाहेब रिमोट कंट्रोल से सरकार चलाते थे। उद्धव सीएम बने। लेकिन 2022 के बाद से ठाकरे परिवार सड़क पर है, अब अगर 5 सांसद टूट गए, तो उद्धव के पास लोकसभा में बोलने को भी मंच नहीं बचेगा। पार्टी का नाम जाएगा, निशान जाएगा, बचेगा सिर्फ मातोश्री का पता, क्या उद्धव फिर फेसबुक लाइव करेंगे? क्या फिर इस्तीफा देंगे? इस बार इस्तीफा देने को कुर्सी ही नहीं है। इस बार पार्टी बचाने की लड़ाई है। 2022 में शिंदे ने कहा था, “हम असली शिवसेना हैं।” 2026 में कोई और खड़ा होकर कहेगा, “हम असली उद्धव की शिवसेना हैं।” और उद्धव देखते रह जाएंगे, इतिहास खुद को दोहरा रहा है। बस 2022 में विलेन शिंदे थे, 2026 में विलेन कोई और होगा। कहानी वही… ठाकरे परिवार अकेला।
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