उत्तराखंड में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. फिलहाल में सीएम धामी समेत 7-8 मंत्री ही कार्यरत हैं, जबकि राज्य की कैबिनेट में कुल 12 मंत्री हो सकते हैं. इसे लेकर राज्य में कई विधायकों के नामों की चर्चा तेज है.
उत्तराखंड मंत्रिमंडल का होगा विस्तार
उत्तराखंड में इन दिनों सियासी हलचल तेज हो गई है. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मंत्रिमंडल को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. माना जा रहा है कि सरकार में जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है. The Truth24 के सूत्रों की मानें तो नवरात्रि के दौरान ही कैबिनेट में खाली पदों को भरा जा सकता है. आपको बता दें कि उत्तराखंड में फिलहाल के समय में 5 मंत्री पद खाली हैं.
7-8 मंत्री ही हैं कार्यरत
आपको बता दें कि पहले प्रेमचंद के इस्तीफा देने के बाद यह संख्या बढ़ गई थी. नियमों के मुताबिक राज्य की कैबिनेट में कुल 12 मंत्री हो सकते हैं, लेकिन फिलहाल में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी समेत 7-8 मंत्री ही काम कर रहे हैं. सूत्रों के मुताबिक मुख्यमंत्री धामी ने हाईकमान से इस मामले में चर्चा कर ली है. इसी के साथ प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने भी इस बात का इशारा दिया है, कि मंत्रिमंडल के विस्तार का समय अब आ गया है.
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जल्द आ जाएगी नामों की लिस्ट
आपको बता दें कि उत्तराखंड में मंत्रिमंडल के विस्तार के साथ 2 दर्जन से ज्यादा विधायकों को दायित्वधारी बनाने की तैयारी भी की जा रही है, जिससे संगठन और सरकार दोनों के बीच में संतुलन बना रहे. मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर अभी फिलहाल नामों की लिस्ट को जारी नहीं किया गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि जल्द ही नामों को घोषित कर दिया जाएगा. हालांकि राजनीतिक गलियारों में इस मामले को लेकर कुछ नाम काफी चर्चा में हैं.
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर ये नाम चर्चा में-
- खजान दास
- मदन कौशिक
- प्रदीप बन्ना
- विनोद कंडारी
- भरत चौधरी
- बंशीधर भगत
- राम सिंह कैड़ा
इन नामों के अलावा राज्य में सहदेव पुंडीर और सुरेश चौहान जैसे विधायकों को भी मौका मिल सकता है.
बेहद जरूरी है मंत्रिमंडल का विस्तार
आपको बता दें कि मंत्रिमंडल का विस्तार सिर्फ खाली पड़े पदों को भरने के लिए नहीं किया जाएगा. बल्कि यह विस्तार 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों की रणनीति से भी जुड़ा हुआ है. दरअसल बीजेपी राज्य में एंटी-इनकंबेंसी को कम करने के लिए और नए चेहरों को मौका देकर सरकार में नई ऊर्जा को लाना चाहती है. सूत्रों के मुताबिक इन पदों पर विधायकों की परफॉर्मेंस को देखकर ही उनका चयन किया जाएगा.
क्षेत्रों की अलग हैं जरूरतें
आपको बता दें कि उत्तराखंड की राजनीति में मैदान और पहाड़ों का संतुलन हमेशा से ही जरूरी रहा है. गढ़वाल और कुमाऊं के पहाड़ी क्षेत्रों की जरूरतें अलग-अलग हैं. वहीं हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर जैसे मैदानी इलाकों में समीकरण काफी अलग हैं. माना जा रहा है कि इस बार होने वाले मंत्रिमंडल विस्तार में गढ़वाल से 2-3 मंत्री और कुमाऊं से 1-2 मंत्री के साथ मैदानी इलाके से भी कम से कम 1 मंत्री शामिल किया जा सकता है.
जातीय समीकरणों पर दिया जा रहा ध्यान
उत्तराखंड में राजपूत, दलित, ब्राह्मण और ओबीसी वर्गों का संतुलन भी काफी अहम भूमिका निभाता है. जिसके चलते कैबिनेट के विस्तार में ब्राह्मण, दलित और पिछड़े वर्ग के नेताओं को लेकर रणनीति पर काम हो रहा है. वहीं इसी के साथ दायित्वधारी पदों में महिलाओं और युवाओं को भी शामिल करने की कोशिश की जा सकती है. जिससे सीधे तौर पर वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश हो सकती है.
मंत्रिमंडल विस्तार से होंगे कई फायदे
उत्तराखंड में मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक राज्य में मंत्रिमंडल का विस्तार होने से कई बड़े फायदे हो सकते हैं. इस विस्तार के जरिए पार्टी से नाराज विधायकों को संतुष्ट किया जा सकता है. इससे संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत होगा, इसी के साथ एंटी इनकंबेंसी को भी कम किया जा सकता है. विधायकों के मंत्री बनने के बाद वे सभी अपने क्षेत्रों में विकास के कामों को और बी तेजी से करेंगे, जिससे सरकार की छवि जनता के सामने और भी सकारात्मक हो जाएगी.
2027 चुनाव की रणनीति का अहम हिस्सा
साल 2027 में उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव हैं. जिसके चलते पार्टी ने जनता को साधने और वोट बैंक को मजबूत करने के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं. बीजेपी का टारगेट 2027 में चुनाव जीतकर तीसरी बार सत्ता में वापसी करना है. जिसके चलते मंत्रिमंडल विस्तार को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है. हालांकि यह इतनी भी आसान नहीं नजर आ रहा है. इस दौरान अगर बड़े नेताओं को नजरअंदाज किया जाता है, तो नाराजगियां भी बढ़ सकती हैं.
हालांकि अभी तक राज्य में मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर विधायकों के नामों की लिस्ट जारी नहीं की गई है. सूत्रों की मानें तो पार्टी जल्द ही विधायकों के नामों की लिस्ट जारी कर सकती है. मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर राज्य में कई विधायकों के नामों की चर्चा तेज हो गई है. अब राज्य की आंखें पार्टी के हाईकमान के फैसले के ऊपर टिकी हुई हैं.
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