उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शुक्रवार को नेशनल पैरालंपिक पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप का शुभारंभ किया है. सीएम धामी ने यह शुभारंभ रुड़की में मौजूद कोर यूनिवर्सिटी में किया है. उन्होंने यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले एक दशक में भारत के खेल में ऐतिहासिक बदलाव आया है. उन्होंने कहा कि यह दशक भारतीय खेलों का गोल्डन पीरियड बन गया है.
मुख्यमंत्री ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं है, बल्कि यह भारत की उस इच्छाशक्ति का उत्सव है, जो हर दिक्कत को एक मौके के तौर में बदल देती है. उन्होंने कहा कि पावरलिफ्टिंग खेल खुद में साहस और अनुशासन का प्रतीक है और यह खेल सिर्फ शारीरिक ताकत ही नहीं बल्कि मानसिक मजबूती और हौसले की भी पहचान है. उन्होंने कहा कि आज भारत के दिव्यांग खिलाड़ी हर क्षेत्र में भारत का नाम आगे बढ़ा रहे हैं.
इस दौरान सीएम धामी ने भारत के पहले पैरालंपिक स्वर्ण पदक विजेता मुरलीकांत पेटकर की भी चर्चा की. मुरलीकांत पेटकर ने साल 1972 में पैरालंपिक की तैराकी प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल जीता था. इन्हीं के साथ सत्येंद्र सिंह लोहिया भी ऐसे भारतीय दिव्यांग खिलाड़ी बने थे, जिन्होंने इंग्लिश चैनल को 12 घंटे में तारकर पार किया था. मुख्यमंत्री ने इस दौरान पैरा तीरंदाज शीतल देवी की भी चर्चा की, इन्होंने दोनों हाथ न होने के बाद भी विश्व पैरा तीरंदाजी प्रतियोगिता में गोल्ड मैडल जीता था. सीएम धामी ने कहा कि दिव्यांग महिला टीम ने भी कोलंबो में T-20 ब्लाइंड वूमेन क्रिकेट वर्ल्ड कप 2025 जीतकर देश का नाम बढ़ाया है.
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उन्होंने कहा कि टोक्यो पैरालंपिक में अवनी लेखरा और सुमित अंतिल ने गोल्ड मैडल जीतकर अपनी धाक जमाई है. उन्होंने कहा कि 2024 में पेरिस पैरालंपिक में भारतीय खिलाड़ियों ने देश के लिए 29 मैडल जीतकर इतिहास रच दिया है. इसी के साथ 2025 में दुबई में हुए एशियन यूथ पैरा गेम्स में 110 मैडल जीतकर भारत के खिलाड़ियों ने पूरी दुनिया को भारत की ताकत दिखाई है. इसी के साथ में सीएम धामी ने पद्मश्री दीपा मलिक की तारीफ करते हुए कहा कि वे भारत की पहली महिला हैं, जिन्होंने पैरालंपिक पदक जीता है. उन्होंने साल 2016 में रियो पैरालंपिक में शॉटपुट में रजत पदक को जीता था.
सीएम धामी ने कोर यूनिवर्सिटी में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में भारत सिर्फ खेल प्रतियोगिताओं में हिस्से लेने वाला देश नहीं रहा है. अब भारत जीतने की सोच के साथ में मैदान में उतरा है. उन्होंने इस बदलाव के पीछे प्रधानमंत्री मोदी की सोच और मजबूत खेल नीति को जिम्मेदार बताया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने खेल बजट को 3 गुना बढ़ाया है और केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई खेलो इंडिया जैसी योजनाओं की मदद से देशभर के खिलाड़ियों को मौका मिला है.
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेलों के सफल तरह से आयोजन के बाद में राज्य को देवभूमि के साथ-साथ खेलभूमि के रूप में भी पहचान मिली है. इन खेलों में उत्तराखंड के खिलाड़ियों ने 103 मैडल जीतकर 7वां स्थान हासिल किया. प्रदेश की सरकार विश्वस्तरीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा कि इसी कारण आज उत्तराखंड राज्य सिर्फ देश ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर की खेल प्रतियोगिताओं को भी आयोजित करने में सक्षम बना है.
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिव्यांग खिलाड़ियों के माता-पिता की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी अपने बच्चों को कमजोर नहीं समझा है, बल्कि उन्हें खुद की ताकत बनाया है. जिसके चलते आज ये लोग पूरे देश के लिए एक प्रेरणा बन चुके हैं. कोर यूनिवर्सिटी में आयोजित इस कार्यक्रम में पद्मश्री दीपा मलिक, पैरालंपिक कमेटी ऑफ इंडिया के महासचिव जयवंत हम्मुनावा और इंडिया पैरा पावरलिफ्टिंग के चेयरपर्सन जेपी सिंह के साथ कोर यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जेसी जैन के साथ कई लोग मौजूद रहे.
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