Non hindus entry ban ganga ghats: हरिद्वार में गंगा सभा ने गैर-हिंदुओं के लिए घाटों पर प्रवेश बंद करने और यह नियम सरकारी अधिकारियों व मीडिया पर भी लागू करने की मांग की है. उत्तराखंड सरकार इस प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रही है.

Non hindus entry ban ganga ghats: उत्तराखंड के हरिद्वार में गंगा घाटों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. गंगा सभा ने मांग की है कि हर की पौड़ी और आसपास के गंगा घाटों पर गैर-हिंदुओं का प्रवेश पूरी तरह से बंद किया जाए. अब उन्होंने यह प्रस्ताव बढ़ाते हुए कहा है कि यह प्रतिबंध सरकारी अधिकारियों, संस्थानों और मीडिया कर्मियों पर भी लागू होना चाहिए. उनका कहना है कि कुंभ क्षेत्र की पवित्रता और गंगा मां की धार्मिक पहचान को बनाए रखना सबसे जरूरी है.
गंगा सभा के अध्यक्ष नितिन गौतम ने हरिद्वार के जिला सूचना अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारियों से अपील की है कि उनके विभाग का कोई भी गैर-हिंदू कर्मचारी इन घाटों में प्रवेश न करे. उन्होंने कहा कि चाहे वह सरकारी कार्यालय हो, कोई संस्था हो या मीडिया का प्रतिनिधि, सभी को इस नियम का पालन करना होगा. उनका मानना है कि यह कदम सनातन परंपरा और धार्मिक भावनाओं की रक्षा के लिए आवश्यक है.
गंगा सभा ने यह भी कहा कि हर की पौड़ी पर 1916 के नियम पहले से मौजूद हैं, जो घाटों पर गैर-हिंदुओं के प्रवेश को रोकते हैं. इसे संविधान के तहत लागू किया जाना चाहिए. गौतम ने हाल की घटना का भी जिक्र किया, जिसमें दो युवक अरब शेख के वेशभूषा में घूमते और वीडियो बनाते दिखाई दिए. हालांकि, जांच में पता चला कि वे हिंदू थे, लेकिन ऐसा दिखाने का प्रयास किया गया. उन्होंने कहा कि इस तरह के मामलों को गंभीरता से रोकना जरूरी है.
गौतम ने प्रशासन से आग्रह किया कि घाटों पर स्पष्ट बोर्ड लगाए जाएं, जो गैर-हिंदुओं के प्रवेश पर रोक की जानकारी दें. साथ ही, उन्होंने मीडिया संस्थानों से भी अपील की कि वे प्रतिबंधित क्षेत्रों में गैर-हिंदू पत्रकारों को न भेजें. उनका कहना है कि प्रशासन को इलाके की पवित्रता बनाए रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए और नियमों का पालन सुनिश्चित करना चाहिए.

हाल ही में गंगा सभा और संत समुदाय ने यह भी मांग की थी कि कुंभ मेले में आने वाले सभी घाटों को गैर-हिंदुओं के लिए प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया जाए. उत्तराखंड सरकार इस पर गंभीरता से विचार कर रही है. गंगा सभा का मानना है कि इससे धार्मिक स्थलों की सुरक्षा और पवित्रता सुनिश्चित होगी और मेलों में आने वाले श्रद्धालुओं की भावनाओं की रक्षा होगी.
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