west bengal election 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के पहले चरण में 91.4% का ऐतिहासिक मतदान दर्ज किया गया है, जो 2021 के मुकाबले लगभग 10% अधिक है. मुर्शिदाबाद और दक्षिण दिनाजपुर जैसे जिलों में भारी वोटिंग और नए राजनीतिक समीकरणों ने 4 मई को आने वाले नतीजों को बेहद रोमांचक बना दिया है.

west bengal election 2026: West Bengal में विधानसभा चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड मतदान देखने को मिला है. इस बार वोटिंग प्रतिशत ने पिछले कई चुनावों के आंकड़े तोड़ दिए हैं. पहले चरण में 152 सीटों पर करीब 91.4 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. अंतिम आंकड़ा 92 से 93 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. यह संख्या साल 2021 के विधानसभा चुनाव से करीब 10 प्रतिशत ज्यादा है. उस समय पहले चरण में लगभग 83.2 प्रतिशत वोटिंग हुई थी. इतनी ज्यादा वोटिंग ने राजनीतिक दलों और चुनावी विश्लेषकों को हैरान कर दिया है. अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस भारी मतदान से फायदा किसे मिलेगा. क्या इसका लाभ Mamata Banerjee की पार्टी को मिलेगा या फिर Bharatiya Janata Party को.
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि मतदान प्रतिशत में बड़ा बदलाव अक्सर चुनाव के परिणामों को प्रभावित करता है. पिछले कई विधानसभा चुनावों के आंकड़ों को देखें तो जब वोटिंग कम रही या लगभग बराबर रही, तब कई जगह मौजूदा सरकार को फायदा मिला. उदाहरण के तौर पर Madhya Pradesh, Uttar Pradesh और Goa में ऐसा देखा गया. हालांकि कुछ राज्यों में इसका उल्टा भी हुआ है. जैसे Chhattisgarh, Rajasthan, Telangana और Punjab में कभी कम तो कभी ज्यादा वोटिंग के बावजूद सरकार बदल गई. लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि जब मतदान सात प्रतिशत या उससे ज्यादा बढ़ जाता है तो इसका मतलब होता है कि जनता किसी बड़े फैसले के मूड में है. या तो वह सरकार को मजबूत समर्थन देना चाहती है या फिर उसे हटाने का फैसला कर चुकी होती है.
पहले चरण में जिन जिलों में मतदान हुआ, वहां कई जगह रिकॉर्ड वोटिंग दर्ज की गई. सबसे ज्यादा वोटिंग Dakshin Dinajpur जिले में हुई, जहां लगभग 94.4 प्रतिशत लोगों ने मतदान किया. इसके बाद Cooch Behar में करीब 94 प्रतिशत वोटिंग हुई. वहीं Birbhum में 93.2 प्रतिशत और Jalpaiguri में करीब 92.7 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. Murshidabad जिले में भी लगभग 92.7 प्रतिशत लोगों ने वोट डाला. मुर्शिदाबाद में कुल 22 विधानसभा सीटें हैं और यहां मुस्लिम आबादी काफी ज्यादा है. इसी कारण यहां का चुनावी मुकाबला काफी दिलचस्प माना जा रहा है.
मुर्शिदाबाद जिले में इस बार एक नया राजनीतिक समीकरण भी चर्चा में है. यहां Humayun Kabir नाम के नेता ने अपनी अलग पार्टी बनाकर चुनाव मैदान में उतरने का फैसला किया है. माना जा रहा है कि अगर वे मुस्लिम वोटों में सेंध लगाते हैं तो इसका असर सीधे टीएमसी पर पड़ सकता है. ऐसी स्थिति में कई सीटों पर मुकाबला बदल सकता है और बीजेपी को अप्रत्यक्ष फायदा मिल सकता है. खास बात यह भी है कि जिन सीटों पर मुस्लिम मतदाता ज्यादा हैं, वहां कई जगह 95 प्रतिशत से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई.
इस बार चुनाव शांतिपूर्ण माहौल में कराने के लिए भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई. चुनाव आयोग ने लगभग 2 लाख 40 हजार केंद्रीय सुरक्षाबलों को तैनात किया. इसके कारण कई इलाकों में बिना डर के मतदान हुआ. पहले के चुनावों में हिंसा की खबरें ज्यादा आती थीं, लेकिन इस बार हालात काफी शांत रहे. जानकारों का कहना है कि अगर लोग बिना दबाव के वोट डाल रहे हैं तो इसका असर चुनाव परिणामों में दिख सकता है. पिछली बार बीजेपी को 77 सीटें मिली थीं और टीएमसी ने 215 सीटें जीती थीं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार का भारी मतदान किस पार्टी के पक्ष में जाता है. इसका असली जवाब 4 मई को नतीजों के दिन ही मिलेगा.
