Shankaracharya Avimukteshwaranand Latest News: शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े केस से बड़ा अपडेट सामने आया है. हाईकोर्ट जज ने खुद को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया है. अवमानना याचिका सीजीए को भेजी गई है. नई बेंच अब इस पूरे मामले की सुनवाई करेगी. यह मामला अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ दर्ज पॉक्सो और अवमानना से जुड़े आरोपों को लेकर काफी चर्चा में है.
सुनवाई से अलग हुए रोहित रंजन अग्रवाल
इलाहाबाद हाई कोर्ट में गुरुवार को मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने खुद को इस केस की सुनवाई से अलग कर लिया. उन्होंने मामले को मुख्य न्यायाधीश के पास भेजते हुए अनुरोध किया कि इसकी सुनवाई किसी दूसरी बेंच से कराई जाए. इसके बाद अब मुख्य न्यायाधीश के नामांकन के अनुसार दूसरी पीठ इस याचिका पर आगे सुनवाई करेगी. हालांकि न्यायमूर्ति के खुद को अलग करने के पीछे अदालत की ओर से कोई विस्तृत कारण सार्वजनिक नहीं किया गया है, लेकिन इस घटनाक्रम को मामले में अहम मोड़ माना जा रहा है.
याचिका में अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग
यह अवमानना याचिका आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज की तरफ से दायर की गई है. इस अवमानना याचिका में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की मांग की गई है. दोनों पर नाबालिगों के साथ यौन उत्पीड़न से जुड़े पॉक्सो मामले में गंभीर आरोप हैं. कोर्ट ने 27 फरवरी और 25 मार्च को जमानत देते समय यह स्पष्ट शर्त लगाई थी कि आरोपी किसी भी प्रकार से न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित नहीं करेंगे और न ही मामले से जुड़े पक्षों पर दबाव बनाएंगे.
आशुतोष महाराज ने लगाया अवमानना का आरोप
इस पूरे विवाद की शुरुआत जगद्गुरु रामभद्राचार्य के शिष्य आशुतोष महाराज की शिकायत से हुई थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अविमुक्तेश्वरानंद और उनके शिष्य मुकुंदानंद ब्रह्मचारी हाईकोर्ट द्वारा दी गई जमानत शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं. इस याचिका में कहा गया कि दोनों आरोपी पॉक्सो मामले में कोर्ट के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और लगातार सार्वजनिक कार्यक्रमों में शामिल होकर न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही मीडिया में बयान देकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई, जिससे पीड़ित परिवारों में भय उत्पन्न हो.
अगला कदम
अब यह मामला हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (Chief Justice) के पास जाएगा, जो इसे सुनवाई के लिए किसी दूसरी बेंच को आवंटित करेंगे. केस की सुनवाई के बीच में जज का अलग होना इस मामले में एक बड़ा अपडेट माना जा रहा है, जिससे अब सुनवाई की तारीख आगे बढ़ सकती है.
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