bangladesh election 2026: बांग्लादेश के संसदीय चुनाव में बीएनपी नेता तारिक रहमान ने ढाका-17 और बोगरा-6 सीट से अनौपचारिक जीत दर्ज की, जो उनकी 17 साल बाद वापसी के बाद बड़ी सफलता मानी जा रही है. अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के बीच इस नतीजे को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है.

bangladesh election 2026: बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेता तारिक रहमान ने बड़ी जीत दर्ज की है. उन्होंने ढाका-17 और बोगरा-6 सीट से अनौपचारिक तौर पर जीत हासिल की है. करीब 17 साल बाद देश लौटे तारिक रहमान के लिए यह जीत काफी अहम मानी जा रही है. इस चुनाव में मुख्य मुकाबला उनकी पार्टी बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी के बीच बताया जा रहा है. देर रात तक वोटों की गिनती जारी रही और शुरुआती रुझानों में बीएनपी आगे दिखाई दी.
बीएनपी के मीडिया सेल सदस्य शायरुल कबीर खान ने गुरुवार को जानकारी दी कि तारिक रहमान दोनों सीटों पर जीत चुके हैं. इस नतीजे को बांग्लादेश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है. खास बात यह है कि इस बार पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की अवामी लीग चुनाव मैदान में नहीं थी. ऐसे में बीएनपी की बढ़त को राजनीतिक समीकरण बदलने वाला कदम माना जा रहा है.
चुनाव के दिन तारिक रहमान ने ढाका के गुलशन मॉडल हाई स्कूल एंड कॉलेज मतदान केंद्र पर सुबह करीब साढ़े नौ बजे वोट डाला. उनके साथ पत्नी डॉ. जुबैदा रहमान और बेटी जाइमा रहमान भी मौजूद थीं. मतदान के बाद उन्होंने मीडिया से बात की और लोगों से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील की. उन्होंने कहा कि देश की जनता लंबे समय से इस दिन का इंतजार कर रही थी. अब लोगों ने अपने अधिकार वापस हासिल किए हैं.
तारिक रहमान ने कुछ इलाकों में अवांछित घटनाओं की खबरों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि अगर लोग बड़ी संख्या में मतदान केंद्रों तक पहुंचेंगे, तो किसी भी तरह की साजिश को नाकाम किया जा सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है, तो कानून-व्यवस्था को मजबूत करना उनकी पहली प्राथमिकता होगी.
यह चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अगस्त 2024 में अवामी लीग सरकार के पतन के बाद यह पहला आम चुनाव हुआ है. अंतरिम सरकार के नेतृत्व में पूरे देश में 299 सीटों पर मतदान कराया गया. एक सीट पर उम्मीदवार की मौत के कारण चुनाव टालना पड़ा. चुनाव आयोग के मुताबिक लगभग 12.7 करोड़ मतदाता पंजीकृत थे, जिनमें करीब 50 लाख पहली बार वोट देने वाले थे. इसके साथ 84 सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत संग्रह भी हुआ. अब सबकी नजर अंतिम नतीजों और नई सरकार के गठन पर टिकी है.
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