UP Panchayat elections: उत्तर प्रदेश में आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों को लेकर प्रशासनिक और सांगठनिक स्तर पर हलचल काफी तेज हो गई है. चुनावों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) के सटीक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने एक बड़ा फैसला लिया है. आयोग अब प्रदेश के सभी जिलों का दौरा करेगा, ताकि जमीनी स्तर पर ओबीसी आबादी और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति के पुख्ता आंकड़े जुटाए जा सकें. हर क्षेत्र की अलग-अलग सामाजिक और स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन कर अंतिम रिपोर्ट तैयार होगी.
स्थानीय परिस्थितियों का अध्ययन करेगा आयोग
आयोग के इस दौरे का मुख्य उद्देश्य केवल कागजी आंकड़े जुटाना नहीं, बल्कि हर जिले की स्थानीय परिस्थितियों का मौके पर जाकर अध्ययन करना है. अलग-अलग क्षेत्रों में पिछड़ी जातियों की संख्यात्मक स्थिति, उनका राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय समीकरण अलग-अलग होते हैं. आयोग इन सभी पहलुओं की बारीकी से समीक्षा करेगा.
विशेष दिशा-निर्देश जारी
इस महा-अभियान को समय से और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग ने उत्तर प्रदेश शासन के प्रमुख सचिव (पंचायती राज) और निदेशक पंचायती राज को विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं. आयोग ने साफ कहा है कि जिलों के दौरों के दौरान स्थानीय प्रशासन और पंचायती राज विभाग के अधिकारी पूरी तरह मुस्तैद रहें और आयोग को हर ब्लॉक व ग्राम पंचायत स्तर के सटीक आंकड़े व दस्तावेज उपलब्ध कराएं. यानी प्रमुख सचिव और निदेशक पंचायती राज को आयोग की मदद के लिए सभी जरूरी डेटा तैयार रखने का आदेश।
‘ट्रिपल टेस्ट’ की तैयारी
आयोग की यह कवायद माननीय सुप्रीम कोर्ट द्वारा पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण के लिए तय किए गए ‘ट्रिपल टेस्ट’ (Triple Test) के मानकों को पूरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है. सभी जिलों का दौरा पूरा होने और डेटा संकलित होने के बाद आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेगा. उसी के आधार पर ही आगामी पंचायत चुनावों में वार्डों और सीटों के आरक्षण की सूची तैयार की जाएगी.
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