स्कूलों में बड़ी संख्या में 11 से 18 साल तक की लड़कियां पढ़ती है. इस उम्र के समय में उनको पीरियड होने शुरू हो जाते हैं. हालांकि, इस समय लड़कियों को पीरियड के बारे में इतना पता नहीं होता है. इन्हीं कारणों की जब उन्हें स्कूल में पीरियड आ जाते हैं, तो उन्हें समझ नहीं आता है कि उन्हें क्या करना चाहिए. इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने एक बड़ा फैसला लिया है.
क्या है यह फैसला
पहले के समय में लड़कियों को या तो स्कूल वाले घर भेज देते थे या तो उनसे पैसे लिए जाते थे. कई हालातों में तो उन्हें पैड देने से मना कर दिया जाता था. इसी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लिया था. कोर्ट का कहना है कि स्कूलों में मिलने वाली सैनेटरी पैड को एक्सट्रा सुविधा में नहीं गिना जाएगा बल्कि यह उन बच्चियों का अधिकार होगा. सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों एवं शिक्षा विभागों को निर्देश जारी कर कहा है कि मासिक धर्म से संबंधित बातों को इन्नोर नहीं करना है.
इसके अलावा प्राइवेट स्कूलों के लिए भी यह निर्देश उतने ही महत्वपूर्ण है. स्कूलों में अब साफ शौचालय, सेनेटरी पैड हर समय में उपलब्ध, पैड को फेंकने के लिए जगह, साथ ही एक हाइजीन के लिए अलग से जगह होनी जरूरी है. अगर जांच में मिलता है कि स्कूल इन नियमों की अनदेखी कर रहा है. तो शिक्षा विभाग द्वारा इन पर सख्त कार्रवाई की जाएगी.
होगी सख्त कार्रवाई
कोई स्कूल सेनेटरी पैड की उपलब्धता वाली जिम्मेदारी को सही से निभाता है या उसमें वह लापरवाही करता है. तो स्कूल की मान्यता तक को रद्द किया जाएगा. हालांकि, कई को पता नहीं है कि अगर उनके साथ ऐसा कुछ व्यवहार किया जा रहा है. तो वह कैसे इस समस्या का समाधान कर सकते हैं या कैसे इसकी शिकायत दर्ज कर सकते हैं.
इस तरीके से करें शिकायत
अगर कोई भी ऐसी समस्या से जूझ रहा है. तो वह जिले के स्तर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी या जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित रूप में शिकायत दे सकता है. सबूत के तौर पर उसमें स्कूल का नाम तारीख या अपनी आपबीती को जरूर जोड़े. अगर आपकी बातों को स्थानीय स्तर पर नहीं सुना जाएगा. तो आप महिला या बाल विकास विभाग और राज्य शिक्षा विभाग में शिकायत को दर्ज करा सकते हैं.
