Mohan bhagwat speech: आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य सत्ता या लोकप्रियता नहीं, बल्कि पूरे समाज को जोड़ना और संगठित करना है, और भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू है. उन्होंने कहा कि भारत को भाषणों से नहीं, अपने आचरण और उदाहरण से विश्व गुरु बनना होगा और सभी धर्मों के लोग देश का हिस्सा हैं.

Mohan bhagwat speech: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में आरएसएस के 100 साल पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में अपने विचार रखे. उन्होंने कहा कि संघ का काम पूरी दुनिया में अलग तरह का है. संघ किसी से मुकाबले या विरोध के लिए नहीं बना है. इसका एक ही उद्देश्य है. पूरे समाज को जोड़ना और संगठित करना. उन्होंने साफ कहा कि आरएसएस को न लोकप्रियता चाहिए और न ही सत्ता. संघ सिर्फ यह चाहता है कि देश में जो अच्छे काम हो रहे हैं, वे ठीक तरीके से पूरे हों. उन्होंने यह भी कहा कि आरएसएस किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा नहीं है. बीजेपी एक अलग संगठन है. उसमें कई स्वयंसेवक जरूर हैं. लेकिन संघ का रास्ता अलग है.
भागवत ने कहा कि भारत का सामाजिक व्यवहार सौदे पर नहीं बल्कि अपनापन और रिश्तों पर चलता है. उन्होंने कहा कि भारत का सनातन स्वभाव कभी नहीं बदलता. हमारे ऋषि मुनियों ने माना कि पूरी दुनिया अपना परिवार है. इसलिए भारत ने अपना ज्ञान सबके साथ बांटा. उन्होंने कहा कि भारत धर्म प्रधान देश है. यहां सबको साथ लेकर चलने की परंपरा है. कोई अकेले रहना चाहे तो उस पर कोई रोक नहीं है. लेकिन समाज के साथ रहना है तो अनुशासन जरूरी होता है. उन्होंने कहा कि सृष्टि की शुरुआत से ही जीवन धर्म के आधार पर चलता आया है.
संघ प्रमुख ने कहा कि भारत को विश्व गुरु बनना है. लेकिन यह केवल भाषणों से नहीं होगा. यह अपने काम और उदाहरण से होगा. उन्होंने कहा कि अगर आप भारतीय हैं, तो यह गुण आपको विरासत में मिला है. उन्होंने यह भी साफ कहा कि भारत के मुसलमान और ईसाई भी भारत के ही हैं. उन्होंने समाज में सबको जोड़ने की बात दोहराई. उनका कहना था कि किसी को अलग नहीं किया जाना चाहिए. भारत की पहचान सबको साथ लेकर चलने से बनी है.
मोहन भागवत ने कहा कि भारत में हिंदू शब्द को लेकर अलग अलग सोच है. उन्होंने कहा कि यहां चार तरह के हिंदू दिखाई देते हैं. पहले वे लोग हैं जो गर्व से कहते हैं कि हम हिंदू हैं. दूसरे वे हैं जो कहते हैं कि हिंदू हैं तो इसमें गर्व की क्या बात है. तीसरे वे हैं जो धीरे से कहते हैं कि हम हिंदू हैं और घर में पूछने पर बताते हैं. चौथे वे लोग हैं जो यह भूल चुके हैं कि वे हिंदू हैं या फिर जिन्हें भूलने पर मजबूर कर दिया गया है. उन्होंने यह भी कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं बल्कि एक विशेषण है. भारत में रहने वाला हर व्यक्ति हिंदू ही है.
अपने भाषण के अंत में भागवत ने डॉ. हेडगेवार का उदाहरण दिया. उन्होंने कहा कि संघ की शुरुआत से ही यह तय था कि उसका केवल एक ही काम होगा. पूरे समाज को जोड़ना. उन्होंने बताया कि कठिन परिस्थितियों में भी डॉ. हेडगेवार ने दो बातों को कभी नहीं छोड़ा. पढ़ाई में हमेशा अच्छा प्रदर्शन करना और देश के काम में सक्रिय रहना. उन्होंने दोहराया कि संघ को सत्ता नहीं चाहिए. संघ को नाम और पहचान भी नहीं चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि धर्मनिरपेक्षता शब्द ठीक नहीं है. सही शब्द पंथनिरपेक्षता होना चाहिए. क्योंकि धर्म जीवन का आधार है.
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